UP नगर निगम चुनाव: सपा के बुरी तरह हार के ये हैं 5 धांसू कारण

लखनऊ.समाजवादी पार्टी पहली बार सिम्बल पर निकाय चुनाव में अपने प्रत्याशी तो उतारे, लेकिन कोई बड़ा नेता चुनाव प्रचार करने नहीं उतरा। अखिलेश से लेकर प्रो. रामगोपाल यादव तक ने चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखी। जबकि बीजेपी ने अपने सीएम से लेकर मंत्रियों को भी चुनाव प्रचार में झोंक दिया। इसके उलट सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सिर्फ एक अपील जारी की। बता दें, 16 नगर न‍िगम में हुए मेयर पद के चुनावों में 14 पर बीजेपी और 2 पर बीएसपी ने जीत हास‍िल की है, जबक‍ि सपा और कांग्रेस जीरो पर आउट हो गई। जनाधारविहीन नेता को सौंपी जिम्मेदारी…UP नगर निगम चुनाव: सपा के बुरी तरह हार के ये हैं 5 धांसू कारण

-निकाय चुनाव की जिम्मेदारी सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पर थी। उन्होंने प्रचार भी किया, लेकिन बीजेपी नेताओं की अपेक्षा उनका अकेले का प्रयास सफल भी नहीं हुआ। एक्सपर्ट्स की मानें तो वह जनाधारविहीन नेता हैं।
-चुनाव के दौरान प्रदेश कार्यालय से को-ऑर्डिनेशन का भी अभाव पूरी तरह से दिखा, जिसका असर चुनावों पर पड़ा।

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प्रचार से बड़े नेताओं ने बनाई दूरी

-न‍िकाय चुनाव में सपा के बड़े नेताओं ने प्रचार से दूरी बनाए रखा, जबक‍ि बीजेपी ने सीएम से लेकर मंत्र‍ियों ने धुंआधार प्रचार क‍िया। इससे सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी रही।

सोशल मीडिया ठप रहा

-सपा विधानसभा चुनावों में सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव थी, लेकिन निकाय चुनाव में अखिलेश यादव का ही ट्वीट आया। पार्टी लेवल पर कैंडिडेट्स को कोई हेल्प नहीं मिली।
-कैंडिडेट्स ने अपने लेवल पर सोशल मीडिया में प्रचार तो किया, लेकिन उसका असर बहुत ज्यादा नहीं दिखा।

पार्टी और परिवार में बिखराव का असर

-पार्टी में बिखराव का असर भी निकाय चुनाव में देखने को मिला। शिवपाल यादव को पूरे चुनाव से किनारे कर दिया गया। यही नहीं, शिवपाल ने अपनी विधानसभा जसवंत नगर में उन्होंने निर्दलीय कैंडिडेट को अपना समर्थन दे दिया। जिससे परिवार की रार एक बार फिर सामने आई।

कास्ट कॉम्बिनेशन नहीं बना पाए

-समाजवादी पार्टी की कास्ट स्ट्रेंथ यादव, मुसलमान और अति पिछड़ा रही है। निकाय चुनाव में शीर्ष नेतृत्व उसका कॉम्बिनेशन बनाने में फेल रही।
-वहीं, इसके उलट बीएसपी ने अपने बेस वोट पर पकड़ बनाई और निकाय चुनाव से वापसी की।

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2019चुनावों में क्या होगा असर

-सपा को पता चल जाएगा कि वह बीजेपी से अकेले नहीं लड़ सकती है, इसलिए वह प्री-पोल टाईअप का प्रयास कर सकती है।
-2019 के लिए अभी से तैयारी में लगना होगा, जहां कमी हो उसे दूर करना है।

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