खाली पोस्टों पर इनकी परमिशन से ही लगेगी बीएड-ईटीटी शिक्षार्थियों की ट्रेनिंग

  • बठिंडा. अध्यापन में कैरियर बनाने वाले बीएड ईटीटी शिक्षार्थियों को अब खाली पोस्टों वाले स्कूलों में टीचिंग प्रेक्टिस करनी होगी और इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी की मंजूरी अनिवार्य है। प्राइवेट कॉलेजों की ओर से अक्सर अपने शिक्षार्थियों को उनकी सुविधा के अनुसार टीचिंग प्रेक्टिस के लिए स्कूल अलॉट कराए जाते हैं जोकि महज एक खानापूर्ति ही साबित होते हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग ने टीचिंग प्रेक्टिस के लिए स्कूल अलॉटमेंट की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी है, इससे खाली पोस्टों वाले स्कूलों में अध्यापकों की कमी पूर्ति के साथ-साथ ट्रेनिंग करने वाले शिक्षार्थियों को टीचिंग का उपयुक्त फायदा होगा।
    Training of BEd-ETT learners will be felt only on their empty posts

    जहां जितने टीचर्स की होगी जरूरत उतने ही शिक्षार्थी लगाएंगे

    अन्य नियमों के अनुसार डीईओ खाली पोस्टों वाले स्कूलों में वहां के अध्यापकों की जरूरत के मुताबिक ही शिक्षार्थियों की टीचिंग प्रेक्टिस लगाएगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी स्कूल में दो अध्यापकों की कमी होगी तो दो शिक्षार्थी ही उस स्कूल में भेजे जाएंगे। इसके साथ ही शिक्षार्थी की ओर से पढ़ाया जाने वाला विषय और स्कूल में उसी विषय के खाली पोस्ट को भी ध्यान में रखा जाएगा। स्कूल शिक्षा सुधार कमेटियों की ओर से स्कूलों के आकस्मिक अथवा रेगुलर निरीक्षण के दौरान भी शिक्षार्थियों के बारे में विशेषतौर पर रिपोर्ट बनाएंगे। वहीं पढ़ो पंजाब पढ़ाई पंजाब के डीएमटी, बीएमटी अथवा सीएमटी की ओर से स्कूलों के दौरे के समय शिक्षार्थियों को भी अपने प्रोग्राम से जोड़कर हिदायतों के अनुसार ही काम ले सकेंगे। कॉलेज अपने स्तर पर किसी भी स्कूल में बीएड ईटीटी शिक्षार्थियों की टीचिंग प्रेक्टिस के लिए नहीं भेजेंगे।

    टीचर ट्रेनिंग बन गई है खानापूर्ति

    अनेक बीएड ईटीटी की ट्रेनिंग प्राइवेट कॉलेजों की ओर से अपने शिक्षार्थियों को टीचिंग प्रेक्टिस देने के लिए विभिन्न स्कूल अलॉट किए जाते हैं। स्कूलों की अलॉटमेंट के बारे में डीईओ की मंजूरी भी नहीं ली जाती। कई स्कूलों में 5 से 10 शिक्षार्थी भेज दिए जाते हैं जबकि संबंधित स्कूलों में तो इन शिक्षार्थियों की जरूरत होती है और ही इन्हें बिठाने के लिए जगह। अक्सर इन शिक्षार्थियों को अलॉट किए गए स्कूल शिक्षार्थियों की सुविधा अनुसार उनके कॉलेज अथवा शहरों के नजदीक होते हैं। इन स्कूलों में लगाई जाने वाली ट्रेनिंग सिर्फ संबंधित बीएड ईटीटी कॉलेजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लगाई जाती है। इससे तो शिक्षार्थी को कोई फायदा होता है और ही शिक्षा विभाग को। स्कूल में ज्यादा शिक्षार्थी भेजने की वजह से अध्यापक अपने निश्चित किए पीरियड नहीं ले पाते जिससे टीचिंग ट्रेनिंग महज खानापूर्ति बनकर रह जाती है।

    टीएलएम के जरिए बच्चों को पर्याप्त ढंग से पढ़ाना रहता है प्रभावशाली

    बीएडईटीटी के शिक्षार्थी अपने अध्यापन कैरियर को लेकर संजीदगी से तैयारी करते हैं और अपने सिलेबस के अनुरूप टीचिंग लर्निंग मटीरियल तैयार करते हैं जिसके आधार पर ही इनकी रैंकिंग होती है। टीएलएम के जरिए बच्चों को पर्याप्त ढंग से पढ़ाना बेहद प्रभावशाली रहता है और इसके सार्थक परिणाम निकलते हैं। इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए शिक्षार्थियों को टीचिंग प्रेक्टिस के दौरान विद्यार्थियों को उनका सिलेबस के मुताबिक ही पढ़ाना होगा और बाकायदा स्कूल मुखिया की ओर से इन शिक्षार्थियों को पढ़ाने का काम दिया जाएगा। निर्धारित टीचिंग प्रेक्टिस खत्म होने पर शिक्षार्थी द्वारा पढ़ाई गई क्लास का एक टेस्ट लिया जाएगा। उस टेस्ट में विद्यार्थियों की ओर से हासिल किए लैवल के मुताबिक ही शिक्षार्थियों की असेसमेंट दी जाएगी।

    खाली पोस्टों वाली स्कूलों में लगाई गई है टीचिंग प्रेक्टिस

    हाल ही में तबादलों की वजह से खाली हुई पोस्टों वाले स्कूलों में ही बीएड ईटीटी शिक्षार्थियों की टीचिंग प्रेक्टिस लगाई गई है। शिक्षा विभाग का अच्छा फैसला है क्योंकि डीईओ ही अपने जिले के स्कूलों में खाली पोस्टों वाले स्कूलों की जानकारी रखता है और इस निर्देश के चलते जहां स्कूलों में अध्यापकों की कमी का बच्चों का नुकसान नहीं होता, वहीं अध्यापक बनने जा रहे इन युवाओं की भी टीचिंग प्रेक्टिस का पर्याप्त मौका मिल सकेगा। मनिंदरकौर, डीईओ सेकंडरी बठिंडा
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