पंजाब: हेरोइन के साथ पकड़ाने पर मां समेत तीनों को हुई थी सजा, जेल में ही दिया जन्म
अमृतसर.केंद्रीय जेल में 11 सालों से कैद पाकिस्तानी बहनें फातिमा और मुमताज और उनकी बच्ची हिना के साथ दो नवंबर को रिहा होने जा रही हैं। इसके लिए सेंट्रल मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स की तरफ से जेल प्रशासन को बुधवार को आदेश आ चुके हैं। यह कार्रवाई महिला वकील नवजोत कौर चब्बा की पहल पर संभव हो सकी है।

ये था मामला…
– साल 2006 में फातिमा और मुमताज अपनी मां के साथ समझौता एक्सप्रेस से भारत आ रही थीं और चैकिंग के दौरान उनके सामान से हेरोइन मिली थी। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया था।
– फातिमा उस वक्त गर्भवती थी। अदालत ने दोनों को 10-10 साल की कैद और दो-दो लाख का जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दो-दो साल और सजा काटने के भी आदेश दिए गए थे।
– इस दौरान फातिमा ने बेटी को जन्म दिया और जेल में ही इन दोनों बहनों की मां की मौत भी हो गई थी।
– इसके बाद इनका अपने परिवार से संबंध खत्म हो गया, क्योंकि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है जिस कारण उधर से कोई नहीं आ सका और ना ही पैरवी हुई।
मसीहा बने भारतीय
-एडवोकेट चब्बा अक्सर जेल में कैदियों की हालचाल लेने जाती रहती हैं और इसी दौरान इस परिवार की उनसे मुलाकात हुई।
– फातिमा बहनों ने उनसे आग्रह किया कि उनके घर फोन करके रिहाई के लिए कोशिश करें। एडवोकेट चब्बा ने बताया कि परिवार वालों से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि वह लोग चार लाख देने की स्थिति में नहीं हैं।
– इस पर चब्बा ने खुद पहल की और उन्होंने प्रसिद्ध समाज सेवक बटाला की सबका भला ह्यूमिनिटी क्लब के प्रधान नवतेज सिंह से संपर्क किया तो वह रुपए देने को तैयार हो गए।
– रुपए बैंक के जरिए अप्रैल महीने में जमा करवा दिए गए।
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यहां आती रहीं रुकावटें
– चब्बा ने बताया कि पाकिस्तान पहले इनको अपना नागरिक मानने को तैयार नहीं था, इसी दौरान वहां की पाक अंबेसी की कौंसलर फौजिया मंजूर यहां आईं और अपनी सरकार को लिखा और पाक इनको लेने के लिए राजी हो गया।
– चब्बा ने बताया कि सब कुछ हो जाने के बाद भी इनकी फाइल कभी पुलिस तो कभी होम मिनिस्ट्री ऑफिस में धूल फांकती रही।
– दौड़-धूप करके उन्होंने इसे आगे बढ़वाया और फिर खुद ही पीएमओ को चिट्ठी तथा फोन पर इस बाबत बताया इसके बाद वहां से रिहाई के आदेश आ गए हैं।
हमने पाक की बेटियों को आजाद करा कर उसके साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है और उसे भी हमारी ही तरह से पहल करते हुए अपने यहां कैद भारतीयों को रिहा करना चाहिए।





