इस गणतंत्र दिवस तो इसलिए आसियान (ASEAN)के 10 देशों के प्रमुख बने मुख्य अतिथि…

नई दिल्ली. 69वें गणतंत्र दिवस पर ASEAN देशों के 10 प्रतिनिधि मुख्य अतिथि हैं. गणतंत्र दिवस समारोह में ये पहला मौका है जब एक साथ 10 राष्ट्रों के प्रतिनिधि भारत के मेहमान हैं. साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के शपथग्रहण में सार्क देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया गया था. गणतंत्र दिवस की परेड में 10 राष्ट्रप्रमुखों को आमंत्रित करने के पीछे क्या कारण है? और भारत ने किस कूटनीति के तहत ये कदम उठाया है, आइए प्रकाश डालते हैं. इस गणतंत्र दिवस तो इसलिए आसियान (ASEAN)के 10 देशों के प्रमुख बने मुख्य अतिथि...

आसियान (ASEAN) क्या है?

ASEAN का फुलफॉर्म है Association of Southeast Asian Nations. इस संगठन में 10 देश, ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं. इसकी एशियन रीजनल फोरम (एआरएफ) में अमेरिका, रूस, भारत, चीन, जापान और नॉर्थ कोरिया सहित 27 सदस्य देश हैं. यह संगठन का गठन 1967 में थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हुआ था. इसके संस्थापक देश थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और सिंगापुर थे. इसके 27 साल बाद 1994 में ASEAN ने एआरएफ बनाया, जिसका मकसद सुरक्षा को बढ़ावा देना था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक ट्वीट में कहा था कि यह (आसियान देशों को न्यौता) भारत की तरफ से सद्भावना और एकजुटता की पहल पर मुहर लगाना है. भारत ने बेहद सटीक कूटनीतिक कदम बढ़ाते हुए ये किया है. इसमें जो महत्वपूर्ण पक्ष भारत से जुड़े हुए हैं, वो भी जानिए-

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इंडो-पैसिफिक नीति पर ध्यान

 भारत की नीति इंडो-पैसिफिक पर खास ध्यान देने की है. भारत यूएस-चीन की तरह ही इस इलाके में अपना प्रभुत्व रखना चाहता है. भारत यह संदेश भी देना चाहता है कि इस इलाके में मौजूद आसियान देशों में उसकी अहमियत चीन-अमेरिका से कहीं ज्यादा है.

एक्ट ईस्ट पॉलिसी को प्रमुखता

 भारत ने ही एक्ट ईस्ट पॉलिसी की शुरुआत की थी. इसके पीछे जो वजह थी, वो ये की इससे हम अपनी आर्थिक स्थिति को और सुदृढ़ करना चाहते थे. इस पॉलिसी में माना जाता है कि हम उन देशों से रिश्ते बढ़ाएं जो कहीं न कहीं सांस्कृतिक रूप से हमारे साथ जुड़े हैं. इसमें ज्यादातर आसियान देश हैं.

हिंद महासागर में संतुलित होंगी शक्तियां

 रणनीतिक रूप से भी आसियान देश बेहद महत्वपूर्ण हैं. चीन का ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ ग्वादर से शुरू होकर फिलीपींस तक है. चीन का न्यू मैरीटाइम सिल्क रूट भी इंडोनेशिया से शुरू होकर जिबूती (हॉर्न ऑफ अफ्रीका) तक जाता है. इसके मुकाबले अगर भारत इस इलाके में मौजूद आसियान देशों से बेहतर रिश्ते बनाते हैं तो हिंद महासागर में वह शक्तियों को संतुलित करने में कामयाब होगा. 

दक्षिणी चीन सागर में दबदबा बढ़ेगा

आसियान के कुछ चीन से आशंकित हैं. ये देश चाहते हैं कि चीन को रोकने के लिए भारत को आगे किया जाए. दक्षिणी चीन सागर का विवाद इसके पीछे अहम वजह है. आसियान संगठन में शामिल वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया और ब्रूनेई इससे सीधे सीधे जुड़े हैं. इसीलिए वे चाहते हैं कि भारत को आगे बढ़ाया जाए.

आसियान में भारत के रिश्तों के 25 सालः भारत और आसियान देशों के रिश्तों को 25 साल पूरे होने जा रहे हैं. इस साल दक्षिण-पूर्व देशों के इस ब्लॉक के गठन के 50 वर्ष, तो इस संगठन से भारत के जुड़ाव को 25 वर्ष हो गए हैं. इस अवसर पर भारत में और आसियान देशों में मौजूद दूतावासों में कार्यक्रम होंगे. इसका विषय ‘शेयर्ड वैल्यूज, शेयर्ड टारगेट (साझा मूल्य, साझा लक्ष्य)’ होगी. मोदी मन की बात में भी इस 25 साल के रिश्ते का जिक्र कर चुके हैं. इस बार का आसियान शिखर सम्मेलन 2018, भारत में आयोजित हो रहा है. राजधानी दिल्ली में दो दिन चलने वाले आसियान सम्मेलन के साथ गणतंत्र दिवस में ये मेहमान शामिल हो रहे हैं.

बता दें कि अब तक गणतंत्र दिवस पर किसी एक देश के राष्ट्राध्यक्ष या प्रतिनिधि को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया जाता था और सिर्फ 3 मौकों पर दो-दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों या प्रतिनिधियों मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया है. ऐसे में 10 देशों के प्रतिनिधियों का गणतंत्र दिवस पर एक साथ मुख्य अतिथि होना एक ऐतिहासिक अवसर है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के 770 स्कूली छात्र आसियान संगठन में शामिल 10 मुल्कों की संस्कृति को दर्शाएंगे. छात्र परिधान और नृत्य के जरिए इसका प्रदर्शन करेंगे. परेड के इतिहास में भी ऐसा पहली बार होगा. जब अपने राज्यों की साथ देश दूसरे मुल्कों की संस्कृति का आनंद लेगा.

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