चीते संग रहता है ये इंसान, हाथों से खिलाता है खाना!

दुनिया में सबसे तेज दौड़ने वाले जानवरों (World Fastest Animal) में चीता को शुमार किया जाता है. लेकिन ये न सिर्फ तेज दौड़ते हैं, बल्कि खतरनाक शिकारी भी माने जाते हैं. ऐसे में इंसान इनसे दूर ही रहता है. लेकिन आपको बता दें कि कभी भारत में भी इन चीतों की धमक हुआ करती थी, लेकिन धीरे-धीरे ये विलुप्त हो गए. कुछ साल पहले जरूर विदेश से कुछ चीतों को भारत लाया गया, लेकिन उनमें से भी कई मर चुके हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये खतरनाक जानवर कभी इंसानों का दोस्त भी हो सकता है? शायद नहीं जानते होंगे, तो बता दें कि सोशल मीडिया पर ऐसा ही एक वीडियो वायरल हो रहा.
इस वीडियो में एक शख्स चीते के साथ सोता हुआ नजर आ रहा है. इतना ही नहीं वो इंसान खतरनाक जानवर को अपने हाथों से खाना भी खिलाता है. इस शख्स का नाम डॉल्फ वोल्कर (Dolph Volkar) है. डॉल्फ और चीते की दोस्ती बहुत तगड़ी है. इन्हें देखकर लगता है कि ये दोनों एक-दूसरे का खयाल रखते हैं. चीते का नाम गेब्रियल (Gabriel the Cheetah) है. ये वीडियो साउथ अफ्रीका के चीता एक्सपीरिएंस ब्रीडिंग सेंटर का है, जिसमें डॉल्फ बतौर वोलेंटियर काम करते हैं. बताया जाता है कि जब गेब्रियल 10 महीने का था, तब डॉल्फ की मुलाकात इससे हुई थी.
उस दौरान गेब्रियल काफी छोटा था. ऐसे में डॉल्फ ने उसका खयाल रखना शुरू किया. कई बार वो अपने हाथों से उसे खाना खिलाते थे. धीरे-धीरे गेब्रियल भी डॉल्फ को अपना दोस्त समझने लगा. इस तरह से दोनों एक-दूसरे के काफी करीब आए. डॉल्फ अपने हाथों से उसे खाना भी खिलाते थे और साथ में सो भी जाते थे. अपने यूट्यूब चैनल पर डॉल्फ ने अपने इस दोस्त के वीडियो को शेयर किया है. बता दें कि चीता पहले इंसानों का बहुत करीबी दोस्त हुआ करता था, लेकिन धीरे-धीरे लोग इससे कटते चले गए. हो सकता है इसके पीछे उसका आक्रामक व्यवहार भी हो.
अपने यूट्यूब चैनल पर डॉल्फ ने लिखा है, ‘साल 2014 में मैं गेब्रियल से मिला था, तब वो 10 महीने का था. मैं उसके साथ खेलता था, घूमता था और रेसलिंग भी करता था. कई बार मैंने उसे खाना खिलाया और साथ में हम सो भी जाते थे. लेकिन अब वह काफी बड़ा हो चुका है, लेकिन उसका लगाव मेरे प्रति कम नहीं हुआ है.’ हाल ही में डॉल्फ ने गेब्रियल नाम के चीते के साथ अपनी दोस्ती के 10 साल पूरे किए. इससे जुड़ा एक वीडियो भी उन्होंने शेयर किया है, जिसमें 10 मिनट में 10 साल की दोस्ती देखी जा सकती है.
बता दें कि डॉल्फ पहली बार चीतों के हित में काम करने वाली संस्था चीता ब्रीडिंग प्रोजेक्ट में काम करने के लिए साउथ अफ्रीका आए थे. वे बतौर वोलेंटियर इस प्रोजेक्ट से जुड़े थे, जिसका मकसद शावकों को उनकी मां के साथ पालना, उन्हें शिकार करना सिखाना और फिर उन्हें जंगल में छोड़ देना था. इसी क्रम में डॉल्फ की मुलाकात गेब्रियल (चीता) से हुई. इसके बाद डॉल्फ ने कई और जानवरों का भी खयाल रखना शुरू किया. वे अब दुनियाभर में वाइल्डलाइफ को लेकर अपनी बात रखते हैं.





