इन 5 वजहों से आपको Silent Treatment देने लगते हैं लोग

क्या आपने कभी किसी करीबी दोस्त पार्टनर या ऑफिस के कलीग को अचानक आपसे बिना किसी कारण बात करना बंद करते हुए देखा है? आप उन्हें बार-बार मैसेज करते हैं फोन करते हैं लेकिन कोई जवाब नहीं! न कोई बहस हुई न कोई झगड़ा फिर भी सामने वाला आपसे दूरी बना लेता है और Silent Treatment देने लगता है। आइए जानें इसकी 5 वजहों के बारे में।

किसी अपने का अचानक बात करना बंद कर देना हर किसी को परेशान कर देता है। कल तक जो इंसान हंस-हंसकर बातें कर रहा था, अब आपको देखकर अनदेखा कर देता है। आप बार-बार पूछते हैं, “क्या हुआ?” लेकिन जवाब में सिर्फ खामोशी मिलती है। यह Silent Treatment यानी चुप्पी से सजा देने का तरीका होता है, जो किसी भी रिश्ते को कमजोर कर सकता है।

लेकिन आखिर लोग ऐसा क्यों करते हैं? क्या वे आपसे नाराज होते हैं या फिर वे आपको किसी गहरी बात का संकेत दे रहे हैं?

अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो हो सकता है कि आपकी कोई अनजानी आदत लोगों को यह कदम उठाने पर मजबूर कर रही हो। आइए जानते हैं वो 5 कारण (Why People Ignore You), जिनकी वजह से लोग आपको साइलेंट ट्रीटमेंट देने लगते हैं और लाख पूछने पर भी चुप्पी नहीं तोड़ते हैं।

फीलिंग्स की न हो कद्र
“क्या यार, इतना छोटा सा मुद्दा है, इसमें क्या नाराज होना?”

अगर आप बार-बार दूसरों की भावनाओं को नजरअंदाज करते हैं, उनकी परेशानियों को हल्के में लेते हैं या उन्हें बार-बार यह जताते हैं कि उनकी बातें मायने नहीं रखतीं, तो लोग खुद को इग्नोर किया हुआ महसूस करने लगते हैं। इस वजह से वे खुलकर बात करने के बजाय चुप्पी साध लेते हैं।

क्या करें?
जब भी कोई अपनी भावनाएं शेयर करे, तो उसे समझने की कोशिश करें। कहें – “मैं समझ सकता/सकती हूँ कि तुम कैसा महसूस कर रहे हो। चलो, इस बारे में बात करते हैं।”

बार-बार समझाकर थक जाना
“मैं हर बार वही बात क्यों समझाऊं?”

अगर कोई व्यक्ति कई बार आपको अपनी परेशानी समझा चुका हो, लेकिन फिर भी आप वही गलती दोहराते हैं, तो धीरे-धीरे वे उम्मीद खो देते हैं और चुप्पी साध लेते हैं। उन्हें लगता है कि आपको समझाना बेकार है और इसलिए वे बात करना बंद कर देते हैं।

क्या करें?
अगर कोई बार-बार एक ही बात दोहरा रहा है, तो इसे गंभीरता से लें और अपने व्यवहार में सुधार करें।

हमेशा खुद को सही मानना
“तुम्हारी गलती थी, मेरी नहीं!”

अगर आप हर बहस में खुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं और सामने वाले की भावनाओं की कद्र नहीं करते, तो लोग धीरे-धीरे आपसे दूरी बनाने लगते हैं। उन्हें लगता है कि आप कभी अपनी गलती नहीं मानेंगे, इसलिए बहस करने का कोई फायदा नहीं है।

क्या करें?
हमेशा सही होने की जिद छोड़ें और कभी-कभी “हां, शायद इसमें मेरी भी गलती थी” कहने की आदत डालें।

इमोशनल मैनिपुलेशन की भावना
“अगर तुम सच में मेरी परवाह करते, तो ऐसा नहीं करते!”

कभी-कभी लोग अपनी बात मनवाने के लिए दूसरों को इमोशनली ब्लैकमेल करने लगते हैं। अगर आप बार-बार किसी को गिल्ट-फील कराते हैं या उन्हें अपने हिसाब से चलाने की कोशिश करते हैं, तो वे आपसे बचने लगते हैं और साइलेंट ट्रीटमेंट देने लगते हैं।

क्या करें?
सामने वाले की भावनाओं का सम्मान करें और जबरदस्ती अपनी बात मनवाने की कोशिश न करें।

मेंटली थकावट महसूस करना
“अब और झगड़ा करने की ताकत नहीं बची!”

कभी-कभी लोग बहस, तनाव या रिश्तों के कॉम्प्लिकेशन से थक जाते हैं और इसलिए चुप्पी साध लेते हैं। उन्हें लगता है कि बात करने से चीजें और बिगड़ सकती हैं, इसलिए वे दूरी बना लेना ही बेहतर समझते हैं।

क्या करें?
अगर आपको लगता है कि सामने वाला मानसिक रूप से परेशान है, तो उसे स्पेस दें और कहें – “जब भी तुम बात करने के लिए तैयार हो, मैं यहां हूं।”

‘साइलेंट ट्रीटमेंट’ कोई इंस्टेंट रिएक्शन नहीं होता, बल्कि यह कई बार हमें खुद यह बताने का संकेत होता है कि कहीं न कहीं हमसे कुछ गलत हो रहा है। अगर आपके आसपास कोई आपसे दूरी बना रहा है, तो समय लेकर तसल्ली से सोचें कि कहीं इनमें से कोई वजह तो नहीं?

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