खौलते पानी की नदी, गलती से भी गिरे तो मौत की 100 प्रतिशत गारंटी!

पेरू के मयंतुयाकु (Mayantuyacu) में एक ऐसी नदी है, जिसका पानी इतना गर्म है कि आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं. अगर गलती से कोई इंसान इस नदी में गिरा गया तो उसकी मौत की 100 प्रतिशत गारंटी है. स्थानीय लोग इसे ‘शनय-टिम्पिश्का’ (Shanay-timpishka) कहते हैं, जिसका अनुवाद ‘सूरज की गर्मी से उबला हुआ’ होता है. आखिर ये नदी इतनी क्यों खौलती है, इसकी वजह आपके होश उड़ा देगी!
नदी में कहां से आता है पानी?: Amusingplanet की रिपोर्ट के अनुसार, नदी में इतना गर्म पानी कहां से आता है यह सवाल एक रहस्य बना हुआ है. स्थानीय लोगों को मानना है कि नदी में गर्म पानी यकुमामा (Yacumama) नामक एक विशाल नागिन छोड़ती है, जिसे ‘जल की माता’ कहा जाता है. नदी के हेडवाटर को सांप के सिर के आकार के एक बोल्डर द्वारा दर्शाया गया है. यहां बोल्डर शब्द का अर्थ बड़े पत्थर के टुकड़े से हो सकता है.
नदी में कितना गर्म है पानी?
यह नदी लगभग 25 मीटर चौड़ी और 6 मीटर गहरी है, लेकिन केवल 6.4 किमी लंबी है, जिसमें पानी का तापमान 50 और 90 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच होता है. हालांकि, कभी-कभी तो 100 डिग्री सेंटीग्रेड तक भी गर्म हो सकता है. नदी के आसपास की जगह जानवरों के लिए खतरनाक है, क्योंकि कई जानवर नदी में गिरकर मर जाते हैं.
क्यों खौलती है ये नदी?
शनय-टिम्पिश्का नदी प्राकृतिक आश्यर्चों में से एक है. इसके खौलने की वजह को लेकर जियोलॉजिस्ट्स ने शोध किया है. उनका तर्क है कि नदी के इस तरह से खौलने के लिए भारी मात्रा में भू-तापीय गर्मी (Geothermal Heat) की जरूर होती है और अमेजन बेसिन निकटतम सक्रिय ज्वालामुखी से 400 मील की दूरी पर स्थित है.
वहीं, Businessinsider की रिपोर्ट में बताया गया है कि सक्रिय ज्वालामुखी जैसे शक्तिशाली ताप स्रोत के बिना नदी इतनी गर्मी और तीव्रता से नहीं उबल सकती है. साऊथ मेथोडिस्ट यूनिवर्सिटी के जियो-थर्मल साइंटिस्ट एन्ड्रेस रूजो ने इस नदी को लेकर ‘द बॉयलिंग रिवर: एडवेंचर एंड डिस्कवरी इन द अमेज़न’ नामक बुक लिखी है. साथ ही वे इस खौलती नदी की विस्तार से जियो-थर्मल स्टडी भी कर रहे हैं.





