धरती के पास स्थित वो छोटा-सा ग्रह, जहां है हीरों का खजाना

लोग पृथ्वी पर खजानों के तलाश के लिए क्या क्या नहीं करते हैं. पर पृथ्वी से बाहर भी कई जगह खजाने भरे पड़े हैं किसी क्षुद्रग्रह पर सोने का भंडार है तो कहीं हीरों की भरमार. पर अब वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के पास ही हीरों का खजाना मिला है जो धरती के हर आदमी को अरबों का मालिक बना सकता है. चीन के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में दावा किया है कि बुध ग्रह पर हीरों का खजाना हो सकता है उन्होंने इसके साथ ही यह भी पता लगा लिया है कि यह ग्रह इतना काला क्यों दिखता है.
दक्षिणी चीन के झूहाई की सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं कहना है कि बुध ग्रह के असामान्य रूप से काले होने के पीछे का रहस्य चमकीला होना चाहिए. वैज्ञानिकों के अध्ययन में बताया गया है कि ग्रेफाइट इस ग्रह को कुछ ज्यादा ही गहरे रंग का दिखाता है. उनका कहना है कि यहां ग्रेफाइट की मात्रा पिछले आंकलनों से कम हो सकती है और इस बात की संभावना ज्यादा है कि यहां हीरे और कार्बन के अन्य प्रारूप ज्यादा मौजूद हों.
अपनी दलील में शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर पिछली गणनाएं सही होती तो सतह पर ही बहुत से हीरे और अन्य तरह के कार्बन पदार्थ देखने को मिलते, जबकि ऐसा नहीं है. यह अध्ययन नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुआ है. नासा के मैसेंजर यान ने जिसने 2011 से 2015 तक बुध के आंकड़े लिए थे, जिनका उपयोग शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में किया था.
बुध सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है जो चंद्रमा से कुछ ही बड़ा है. यह पथरीला ग्रह पृथ्वी से 7.7 करोड़ किलोमीटर दूरी पर है. वैज्ञानिक मानते हैं कि यहां पहुंचना तो कठिन है ही, यहां जीवन के पनपने की संभावना भी नहीं है. पिछले अध्ययन भी मानते हैं कि कार्बन बुध की सतह के बहुत नीचे बना होगा. लेकिन नए अध्ययन में कहा गया है कि यह पूरा कार्बन ग्रेफाइट नहीं हो सकता है.
ग्रेफाइट का उपयोग पेनसिल की लीड में होता है जो कार्बन का सबसे स्थिर रूप होता है. पर बहुत अधिक तापमान और 3 हजार डिग्री सेल्सियस के तापमान से भी कम में यह हीरे में बदल जाता है. बुध में 4 अरब साल पहले ही कार्बन से हीरे बनने लगे होंगे. भविष्य के बुध ग्रह पर भेजे जाने वाले अभियानों से नमूने ला कर इस बारे में और जानकारी मिलेगी.





