द्वारका के तालाब में सीवर का गंदा पानी आना हुआ शुरू , जिसकी वजह से मछलियां तड़पने लगी..

लापरवाही की वजह से एक बार फिर इस तालाब में सीवर का गंदा पानी छोड़ दिया गया। चूंकि इस तालाब में अभी पानी काफी कम था इसलिए जैसे ही इसमें सीवर का गंदा पानी आना शुरू हुआ मछलियां तड़पने लगी।

द्वारका और पोचनपुर गांव के युवाओं के द्वारा सेक्टर- 22 व 23 तालाब को पुनर्जीवित करने के प्रयास को एक बार फिर से झटका लगा है। लापरवाही की वजह से एक बार फिर इस तालाब में सीवर का गंदा पानी छोड़ दिया गया। चूंकि, इस तालाब में अभी पानी काफी कम था इसलिए जैसे ही इसमें सीवर का गंदा पानी आना शुरू हुआ मछलियां तड़पने लगी।
जानकार कहते हैं कि इस स्थिति में जबकि सीवर का गंदा पानी तालाब में भर चुका है मछलियों का बचना मुश्किल है। हालांकि, स्थानीय लोगों की शिकायत पर डीडीए के अधिकारियों ने तुरत फुरत में सीवर का गंदा पानी तालाब में छोड़े जाने पर रोक लगाने की पहल शुरू कर दी। तब तक तालाब में एक चौथाई सीवर का पानी जा चुका था।
पहले भी हो चुका है ऐसा
दरअसल, द्वारका में ट्रंक ड्रेन दो का सुंदरीकरण किया जा रहा है । इस दौरान नाले को खाली करने के लिए सीवर का गंदा पानी तालाब में छोड़ दिया गया। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है सीवर का गंदा पानी के तालाब का नुकसान पहुंचा है। इसके पहले भी इस तरह की घटना हो चुकी है।
स्थानीय निवासी और पर्यावरणविद् दीवान सिंह बताते हैं कि सेक्टर 22,23 का स्थानीय तालाब में वर्षा जल का रास्ता नहीं छोड़ा गया। जिससे वर्षा जल की आपूर्ति होती रहती थी। लेकिन यह रास्ता छोड़ने के बजाए, बिना किसी विचार किए, इस लिंक के ऊपर एक सड़क बना दी गई है। इसलिए तालाब को वर्षा जल से भरने के लिए बरसाती नाला का उपयोग किया जाने लगा। लेकिन जब तब इसमें सीवर का गंदा पानी छोड़ दिया जाता है।
दुर्गंध में मछलियों का बचना संभव नहीं
दीवान सिंह बताते हैं कि इस स्थिति में सीवर के पानी दुर्गंध में मछलियों का बचना संभव नहीं है। जबतक पूरे तालाब को दोबारा साफ नहीं किया जाएगा तब तक इसमें बारिश का साफ पानी जमा नहीं हो सकता।
वे बताते हैं कि तालाब में सीवर का पानी छोड़े जाने की शिकायत दिल्ली विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अभियंता एके अग्रवाल और बागवानी विभाग के सहायक उप निदेशक द्वारका के टीके शर्मा से की तब जाकर सीवर का गंदा पानी आना बंद हो गया है, लेकिन तालाब में अब सीवर का गंदा पानी भर चुका है इसका इको सिस्टम अब ध्वस्त हो चुका है।
दैनिक जागरण से बातचीत में दिल्ली विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अभियंता एके अग्रवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सीवर का काम जल बोर्ड देखता है इसलिए जैसे ही दीवान सिंह ने सूचित किया उसी दौरान दिल्ली जल बोर्ड को शिकायत को लिखित तौर पर दिया था।





