जानवरों की बातें समझ लेता है ये शख्स, बोला- दूसरों के लिए असंभव ये है…

कई फंतासी फिल्में ऐसी हैं जिनमें जानवर भी इंसानों की तरह बात करते हैं या कोई शख्स जानवरों की भाषा समझ पाता है. इस तरह की फिल्मों में एक मशहूर फिल्म डॉ डोलिटिल है. इसमें एक डॉक्टर जानवरों की भाषा समझता है. पर क्या वाकई इंसान जानवरों की भाषा समझ सकता है या बोल सकता है. जानवरों को समझने वाले एक विशेषज्ञ के बारे में कहा जा जाता है कि वे जानवरों से संचार कर सकता है. लेकिन इस डॉक्टर का कहना है कि दूसरे लोग ऐसा नहीं कर सकते.

असल दुनिया के इस डॉ डोलिटल का नाम डॉ एरिक केरशेनबॉम है. जानवरों से इंसानों की “बातचीत” की संभावनाओं के बारे में डॉ केरशेनबॉम का कहना है कि लोग उनके पालतू जानवरों के बर्ताव को समझना सीख सकते हैं लेकिन इस बात की कोई संभावना नहीं है कि जानवर और इंसानों में दो तरफा संवाद हो सके.

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के इस प्रोफसर का कहना है कि इंसान कभी जानवरों से बात नहीं कर सकते क्योंकि जानवरों की अपनी कोई भाषा नहीं होती है. अधिक से अधिक इंसान यह उम्मीद कर सकते है कि ऐसा तरीके निकाले जाएं जिससे यह समझा जा सके कि जानवर क्या कह रहे हैं. जानवर आपस में तो संचार करते हैं लेकिन उनकी भाषा बहुत ही अलग तरह की होती है.

भाषा दरअसरल किसी भी विषय पर आपास में विचार या जानकारी आदान प्रदान करने की काबिलियत है. इंसान क्या क्या कह सकता है इसका अंत नहीं है. लेकिन कोई भी दूसरा जानवर इस तरह से अनंत संचार नहीं करता है. अगर जानवरों की भाषा होती तो हम उसका उपयोग व्यापार, साहित और निर्माण में कर लेते. लेकिन केवल बिना वजह ही भाषा का विकास नहीं होता है.

जानवरों के लिए भाषा की कोई उपोगिता है भी नहीं और यही उनकी भाषा ना होने का सबसे बड़ा प्रमाण है. डॉ केरशेनबॉम का कहना है कि अब चूंकि जानवरों की भाषा नहीं होतीहै तो उसका इंसानों की भाषा में अनुवाद को तो सवाल ही पैदा नहीं होता है. हां ये हो सकता है कि एआई की मदद से जानवरों की आवाज के मतलब समझे जा सकें. इसके अलावा हमारे संचार का भाषा को समझने से इतना गहरा नाता हो गया है कि हम बिना भाषा के संचार की कल्पना ही नहीं कर पाते हैं.

Back to top button