जिंदा होकर भी करवाएगा खुद का अंतिम संस्कार, दुर्लभ बीमारी है इसकी वजह!

बड़ी से बड़ी बीमारियों का इलाज मेडिकल साइंस ने खोज निकाला है. कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के वैक्सीन को भी 1 साल के अंदर ही वैज्ञानिकों ने बना लिया था. लेकिन इस धरती पर आज भी कई ऐसी दुर्लभ बीमारियां हैं, जिनका मेडिकल साइंस के पास भी कोई जवाब नहीं है. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) अभिनीत ‘पा’ फिल्म में ऐसी ही एक दुर्लभ बीमारी प्रोगेरीया का जिक्र किया गया था. लेकिन आज हम आपको एक और रेयर डिजीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका शिकार इंग्लैंड के बोस्टन का रहने वाला एक 18 साल का लड़का है. इस लड़के का नाम राइस विलियम्स (Rhys Williams) है. यकीन मानिए, इस लड़के की हालात के बारे में जानकर आपका भी कलेजा कांप उठेगा.
राइस को जन्म के साथ एपिडर्मोलिसिस बुलोसा (ईबी) अर्थात बटरफ्लाई डिजीज नाम की त्वचा से जुड़ी दुर्लभ बीमारी है. इस बीमारी की वजह से राइस की चमड़ी इतनी पतली है कि पेपर का कोना भी लग जाए तो खून निकल आए. इतना ही नहीं, मामूली सी खुजली से शरीर के लोथड़े बाहर आ सकते हैं. हर दिन वह अपने पूरे शरीर पर पीड़ादायक घावों के साथ रहता है. हालांकि, डॉक्टरों ने कहा है कि अब उसके पास जीने के लिए कुछ दिन बचे हैं. ऐसे में राइस ने अपने अंतिम संस्कार की योजना बनाई है. बता दें कि जब वह बच्चा था तो माता-पिता को बताया गया कि वह 10 साल तक भी जिंदा नहीं रह पाएगा. जब वह 13 साल का हुआ, तो उसने खुद के अंतिम संस्कार की योजना बना ली थी, ताकि जब मौत उसके करीब आए, तो वह इसके लिए तैयार रहे.
इस सितंबर 2023 में वह तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 18 साल का हुआ, लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद, उसे सेप्सिस और निमोनिया हो गया. ऐसे में बीते 4 नवंबर को उसे अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने कहा कि अब वे कुछ नहीं कर सकते और इस तरह राइस का इलाज रोक दिया गया. लाइफ केयर से हटाने के बाद उसे अस्पताल से भेज दिया गया और अब दर्द निवारक दवाओं के सहारे उसकी जिंदगी चल रही है. डॉक्टरों ने शोकाकुल परिवार को बताया कि उसके पास बस कुछ दिन या सप्ताह ही बचे हैं. हो सकता है कि वह क्रिसमस भी न देख पाए. राइस की मां तान्या मूरस (Tanya Moores) ने बताया कि डॉक्टरों ने कहा कि वह इतना नाजुक है कि उसके शरीर में अब कृत्रिम श्वास नली भी नहीं डाला जा सकता है. हालांकि, मेरा लड़का बहुत मजबूत है. जब मैंने उससे ये बात कही तो उसने कहा कि मुझे इस बात का दुख है, लेकिन मैं इससे लड़ने की कोशिश करुंगा.
राइस की मां तान्या ने कहा कि उसने मात्र 13 साल की उम्र में ही खुद के अंतिम संस्कार का प्लानिंग कर लिया था. यह बात जब उसने मुझे बताई तो मैं बहुत भावुक हो गई थी. मुझे उसकी छोटी बहन की खातिर मजबूत रहना है, लेकिन कई बार डर भी लगता है. इसलिए रात में मैं सो भी नहीं पाती हूं. तान्या के मुताबिक, वह कभी भी खाना नहीं बना सकता, बाइक नहीं चला पाया और यहां तक की खुद की दांतों में ब्रश भी नहीं कर पाता है. अगर ऐसा कुछ भी करता है तो वो खुद को चोट पहुंचा लेगा. हालांकि, जो लोग राइस को नहीं जानते, वो भद्दे कमेंट्स करने से भी बाज नहीं आते. तान्या ने कहा कि रास्ते में कई लोग उसे मॉन्स्टर कहते हैं.
क्या है बटरफ्लाई डिजीज?
बटरफ्लाई डिजीज को मेडिकल साइंस में एपिडर्मोलिसिस बुलोसा कहा जाता है. यूं तो जन्म के साथ ही बच्चों में ये दुर्लभ बीमारी होती है, लेकिन कई बार जन्म के बाद भी लोग इसके शिकार हो जाते हैं. दुनियाभर में 50 हजार में से 1 बच्चा इससे ग्रसित है. बीमारी के शिकार 40 प्रतिशत बच्चे 5 साल के अंदर ही मर जाते हैं. इस बीमारी के 3 चरण हैं. पहला- ईबी सिम्प्लेक्स, जहां त्वचा की ऊपरी परत में छाले पड़ जाते हैं. इसका असर 70 प्रतिशत मरीजों पर पड़ता है. दूसरा- डिस्ट्रोफिक ईबी, जहां त्वचा की सतह के नीचे ऊपरी परत में छाले हो जाते हैं, जो 25 प्रतिशत रोगियों को प्रभावित करता है. वहीं तीसरा- जंक्शनल ईबी, जहां आंतरिक त्वचा की निचली परत में छाले हो जाते हैं, जो आमतौर पर स्थिति का सबसे गंभीर रूप है.





