साल का पहला सूर्य ग्रहण शुरू, आदित्य एल-1 बेहद करीब से कैप्चर करेगा खास तस्वीरें

आज साल का पहला सूर्य ग्रहण लग चुका है। यह हर मायने में इसलिए खास है क्योंकि यह लगभग 50 सालों बाद सबसे लंबा चलने वाला ग्रहण होगा। यह लगभग 5 घंटे 25 मिनट तक चलेगा।

बता दें कि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण है, जिसके कारण पृथ्वी के कुछ हिस्सा पर थोड़ी देर के लिए अंधेरा छा जाएगा। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखा जाएगा। वहीं अमेरिका से बेहद दुर्लभ तस्वीर सामने आई हैं, यहां पूरे उत्तरी अमेरिका में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा गया।

मेक्सिको में दिखा दुर्लभ नजारा
उत्तरी अमेरिकी देश मैक्सिको में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा गया। यह नजारा देखने लिए बड़ी संख्या में लोग इकठ्ठा हुए और फिल्मी धुनों पर डांस किया।

कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?
सोमवार यानी 8 अप्रैल को होने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण मेक्सिको से संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा फिर उत्तरी अमेरिका में देखने को मिलेगा।

भारत के 3 विज्ञानी अमेरिका रवाना
यह पहला मौका होगा जब भारतीय विज्ञानी जमीन के साथ आसमान से भी सूर्यग्रहण की जांच और परख कर सकेंगे। आठ अप्रैल यानी सोमवार को वर्ष का पहला पूर्ण सूर्यग्रहण लग गया है। पृथ्वी से देश के सौर विज्ञानियों की नजरें दूरबीनों के साथ ग्रहण लगे सूर्य पर होंगी। वहीं, पृथ्वी से 15 लाख किमी दूर स्थित आदित्य एल-1 भी सूर्य के और करीब से ग्रहण का अध्ययन करेगा।

भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण
बता दें कि यह ग्रहण भारत से नहीं देखा जा सकेगा, इसलिए भारत के तीन विज्ञानी व एक इंजीनियर इसके अध्ययन के लिए अमेरिका रवाना हुए हैं। यह पूर्ण सूर्यग्रहण इस बार कई मायनों में खास होगा। प्रो. दीपांकर के अलावा एरीज के ही सौर विज्ञानी डा. एस कृष्णा प्रसाद व इंजीनियर टीएस कुमार टेक्सास और भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बेंगलुरु के पूर्व विज्ञानी प्रो. आरसी कपूर मैक्सिको से पूर्ण सूर्यग्रहण का अध्ययन करेंगे।

पूर्ण सूर्य ग्रहण क्या है?
पूर्ण सूर्य ग्रहण में, चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, जिससे सूर्य का चेहरा पूरी तरह से ढक जाता है। इससे दिन के समय आकाश अंधेरा हो जाता है। बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका में देखा जाने वाला अगला पूर्ण सूर्य ग्रहण 2044 तक नहीं होगा।

आदित्य एल-1 के लिए पहला मौका
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के निदेशक और आदित्य एल-1 साइंस ग्रुप कमेटी व आउटरीच विभाग के सह अध्यक्ष प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बताया कि आदित्य एल-1 के लिए भी यह पहला मौका होगा। इसे वह करीब से देख सकेगा और ग्रहण की तस्वीरों को हम तक पहुंचाएगा। पूर्ण ग्रहण की अवधि करीब चार मिनट 27 सेकेंड की होगी। इस बीच भारतीय विज्ञानियों को आदित्य एल-1 द्वारा ली गई तस्वीरों का बेसब्री से इंतजार रहेगा। ये तस्वीरें भारत ही नही बल्कि दुनिया के सौर विज्ञानियों के लिए अध्ययन में बेहद मददगार होंगी। इस लंबी अवधि के सूर्यग्रहण को ग्रेट नार्थ अमेरिकन टोटल सोलर एक्लिप्स नाम दिया गया है।

कहां-कहां से गुजरेगा सूर्य ग्रहण?
नासा के अनुसार, 8 अप्रैल का ग्रहण दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में शुरू होगा जो टेक्सास पहुंचने से पहले लगभग 11:07 बजे मेक्सिको के प्रशांत तट पर पहुंचेगा। इसके बाद यह ओक्लाहोमा, अर्कांसस, मिसौरी, टेनेसी के एक छोटे से हिस्से, इलिनोइस, केंटुकी, इंडियाना, ओहियो, मिशिगन के एक छोटे से हिस्से, पेंसिल्वेनिया, न्यूयॉर्क, वर्मोंट, न्यू हैम्पशायर और मेन से होकर गुजरेगा। इसके बाद कनाडा के ओंटारियो में प्रवेश करेगा और क्यूबेक, न्यू ब्रंसविक, प्रिंस एडवर्ड आइलैंड और केप ब्रेटन से होते हुए शाम 5:16 बजे कनाडा के न्यूफ़ाउंडलैंड के अटलांटिक तट पर महाद्वीपीय उत्तरी अमेरिका से गुजरेगा।

कहां देख सकते है आप ग्रहण?
मेक्सिको में मजातलान और टोर्रियॉन; टेक्सास में सैन एंटोनियो, ऑस्टिन, वाको, फोर्ट वर्थ और डलास; अर्कांसस में लिटिल रॉक; मिसौरी में सेंट लुइस; केंटुकी में लुइसविले; इंडियाना में इंडियानापोलिस; ओहियो में डेटन, कोलंबस, टोलेडो और क्लीवलैंड; मिशिगन में डेट्रॉइट; पेंसिल्वेनिया में एरी; न्यूयॉर्क में बफ़ेलो, रोचेस्टर और सिरैक्यूज़; और कनाडा में हैमिल्टन, टोरंटो और मॉन्ट्रियल में आप सूर्य ग्रहण को आसानी से देख सकते है।

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