जयपुर.प्रदेश में चिकित्सा विभाग की अनदेखी के कारण स्वाइन फ्लू विकराल रूप लेता जा रहा है। आठ माह में ही 99 लोग जान गंवा चुके हैं। इनमें भाजपा की विधायक कीर्ति कुमारी भी शामिल हैं। यह हालात तब हैं, जबकि अभी ऑफ सीजन है। सर्दी में यह बीमारी ज्यादा असर दिखाती है, तब मृतकों का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। पिछले साल की बात करें तो 2016 में 197 लोग पॉजिटिव मिले थे। इनमें से 43 की मौत हुई थी। पिछले साल की तुलना में 56 मौतें अधिक हो चुकी हैं। शनिवार को प्रदेश में फ्लू के 104 पॉजिटिव आए। कोटा व जयपुर निवासी दो लोगों की मौत हो गई। दोनों जयपुर के मणिपाल व अपेक्स अस्पताल में भर्ती थे।
इसलिए पैर फैला रही है बीमारी
शुरुआत में स्वाइन फ्लू के पॉजिटिव मरीज आने पर मेडिकल विभाग को घर-घर जाकर सर्व करना चाहिए था, लेकिन विभाग ऐसा नहीं कर रहा। जागरूकता के नाम पर अभी तक कोई कार्यक्रम नहीं किए। हर अस्पताल में अलग से मेडिकल टीम होनी चाहिए, लेकिन कई अस्पतालों में टेमी फ्लू तक नहीं है। 24 घंटे की अपेक्षा जांच 8 घंटे हाे रही है। रिपोर्ट सात घंटे की जगह 20 घंटे में आ रही है। वार्ड-पंचायत स्तर पर प्रचार-प्रसार नहीं हो रहा। विभाग अस्पताल में आने वाले मरीजों पर ही ध्यान दे रही है।
खांसी-जुकाम पर जांच कराएं : विशेषज्ञ
खांसी, जुकाम, फीवर आने पर जांच करना अनिवार्य है। वर्तमान में भी 2009 में आया एच-1,एन-1 वायरस ही है। हर साल थोड़ा स्वरूप बदल लेता है, लेकिन इलाज में कोई फर्क नहीं है। अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीज वेंटीलेंटर से भी ठीक होकर जा रहे हैं। एक बार पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर सात दिन में मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव भी आ रही है। यानी दवा के इस्तेमाल में कोई बदलाव नहीं है। -डॉ. रमन शर्मा, प्रोफेसर, मेडिकल यूनिट, एसएमएस अस्पताल