OMG घड़ियों का ऐसा कलेक्शन, आपने पहले नहीं देखा होगा

- in मध्यप्रदेश

इंदौर। इंसान के जीवन में समय का बहुत महत्व है, इसलिए घड़ी भी सभी के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। आज हम आपको ऐसे परिवार से मिलाने जा रहे हैं जिसे जुनून की हद तक घड़ियां जमा करने का शौक है। ये है इंदौर का भल्ला परिवार।

OMG घड़ियों का ऐसा कलेक्शन, आपने पहले नहीं देखा होगाआपको जानकर बेहद आश्चर्य होगा कि ये परिवार 5 पीढ़ियों से घड़ियों का नायाब कलेक्शन कर रहा है। सिर्फ सहेज ही नहीं रहा, बल्कि इन घड़ियों का अच्छी तरह से रख-रखाव भी कर रहा है। खास बात ये है कि अब तो इस परिवार के लोग घड़ियों की टीक-टीक की भाषा तक समझने लगे हैं। घड़ियों के नायाब कलेक्शन के चलते इस परिवार का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिक़ॉर्ड में दर्ज हो चुका है।

आमतौर पर घरों में एक कमरे में एक ही नजर आती है, लेकिन इंदौर के भल्ला परिवार के घर का शायद ही कोई कोना बचा हो जहां घड़ियां ना नजर आए। इस घर की हर दीवारों पर घड़ियां ही घड़ियां ही नजर आती है। घर में प्रवेश करने के साथ ही आपको ऐसा अहसास होगा कि शायद आप घड़ी के किसी शोरूम में आ गए हैं। देश-विदेश की ऐसी नायाब घड़िया जिन्हें आमतौर पर कहीं ओर देख पाना शायद संभव ना हो। भल्ला परिवार के पास जो कलेक्शन है उसमें फ्रांस की सबसे पुरानी घड़ी से लेकर इंग्लैड, जर्मनी, अमेरिका, स्विटजरलैंड सहित अन्य देशों और भारत की कई प्राचीनतम घड़ियों का नायाब कलेक्शन है। इस पूरे कलेक्शन की एक ओर खास बात है कि ये सारी घड़ियां बिना सेल के चलती है यानी ये इलेक्ट्रॉनिक घड़ियां नहीं है। ये घड़ियां पूरी तरह मैन्यूअल हैं और चाबी के जरिए ही चलती हैं।

भल्ला परिवार पिछली 5 पीढ़ियों से केवल इन घड़ियों के नायाब कलेक्शन को बढ़ाने और सहेजने का काम कर रहा है। परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य अनिल भल्ला इन घड़ियों के रखरखाव में सबसे ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। अनिल भल्ला को यह जुनून अपने पिता और दादा से विरासत में मिला हैं। जिसे अब उनके बेटे और नाती-पोते आगे बढ़ा रहे हैं। अनिल भल्ला चाहते है कि उनकी तरह उनकी आने वाली पीढ़ियां भी घड़ियों के इन नायाब कलेक्शन और इनके रख रखाव को जारी रखे।

सालों से कलेक्शन करते करते अब ये स्थिति बन गई है कि घर के हर कोने में घडी ही घड़ी नजर आती है। आलम ये है कि घर में एंट्री करने से पहले ही घड़ियों के नायाब कलेक्शन का अहसास हो जाता है। घर में टॉवर क्लॉक भी है जिसमें 270 किलो का एक बैल भी लगा हुआ है जो 1875 में इंग्लैंड से लाया गया था। इन घड़ियों में 1865 की जर्मन में गोल्ड वर्क और पर्ल मोती से बनी एक मात्र घड़ी भी शामिल है। इसके अलावा नेपोलियन घड़ियां, शीप घड़ी, 12 फीट की घड़ी, सायलेंट घड़ी जैसी कई नायाब घडियां मौजूद हैं। इस कलेक्शन को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में लार्जेस्ट कलेक्शन ऑफ एंटीक वॉचेस के नाम से भी दर्ज किया गया है। इसके अलावा गिनीज बुक ऑॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी परिवार की तरफ से एप्लाइ किया गया है। परदादा, दादा, पिता की जिंदगी की मेहनत और जीवटता के चलते इस उपलब्धि से परिवार के सदस्य काफी खुश है। सभी सदस्य इस कलेक्शन को जारी रखना चाहते हैं और ये भी चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी भी इसे जारी रखे।

भल्ला परिवार के घड़ियों के इस नायाब कलेक्शन में 1730 से लेकर आज के समय की घड़ियों का नायाब कलेक्शन है। इनमें 12 फीट से लेकर पॉकेट घड़ी तक शामिल है। इसके अलावा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान की भी एंटिक घड़ी इस परिवार के कलेक्शन में शामिल है। भल्ला परिवार के सदस्य बताते हैं कि घड़ियों का कलेक्शन और इनका रख रखाव अब उनकी आदत बन चुका है।

एंटिक चीजों का कलेक्शन करने वाले कई लोग हैं लेकिन सिर्फ एंटिक घड़ियों के सबसे बड़े कलेक्शन करने वाला शायद इंदौर का भल्ला परिवार ही है। परिवार के सदस्य बताते हैं कि कई लोगों ने करोड़ों के ऑफर देकर इन घड़ियों के कलेक्शन को खरीदना चाहा लेकिन परिवार के मुताबिक घड़ी की टिक टिक उनके दिलों की धड़कन बन चुकी हैं, ऐसे में इन घड़ियों को बेचने का सवाल ही नहीं उठता। भल्ला परिवार के लिए ये घड़ियां अनमोल है।

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