बिना पैर की छिपकलियों से पनपे थे सांप, बहुत तेजी से हुआ था ये!

करीब 10 करोड़ साल पहले सांपों के पहले की दुनिया बहुत ही अलग तरह की दुनिया थी. उस समय दुनिया में रहने वाले आज के सांपों के पूर्व छोटे सी छिपकलियां हुआ करती थीं. लेकिन यही छिपकलियां, जो उस समय डायनासोर की छत्रछाया में रहती थीं, बदलाव और विविधता की एक अनोखी बानगी लिखने जा रही थीं. इस कहानी में बहुत तेजी से बदलाव आए. छिपकलियां बिना पैर की बनी और फिर आज के युग की हजारों सापों की प्रजातियां पनपी. जो विकास क्रम के बदलाव की कथासगार की शानदार दास्तान है.
शुरु से सांपों के पूर्वजों ने शानदार “ढलने की काबिलियत” दिखाई. वे पहले बिना पैर के शरीर में बदले और एक बढ़िया रसायन पहचान करने वाला तंत्र विकसित किया जिससे वे शिकार को पकड़ सकें. समय के साथ उन्होंने कई तरह की चुनौतियां का हल तक निकाला. पर डायनासोर के युग के अंत के बाद ऐसा क्या हुआ जिससे इतना तेजी से बदलाव हुआ और आज दुनिया में सांपों की 4 हजार प्रजातियां हैं?
मिशीगन विश्वविद्यालय के बायोलॉजिस्ट की टीम ने इसका जवाब खोजा है. साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में उन्हें बताया है कि कैसे तेजी से होने वाले विकास के साथ सांपों ने ऐसे शानदार गुण अपनाए जिनसे वे दूसरे सरीसृपों की तुलना में बहुत ही खास प्रजातियां बनते चले गए.
शोधकर्तांओं ने बताया कि छिपकलियों की तुलना में सांपों ने ज्यादा तेजी से विकास किया जिससे वे दूसरी छिपकलियों की तुलना में काफी आगे निकलते चले गए. उन्होंने विविधता, लचीलापन, और शिकार करने के ऐसे हुनर हासिल किए जो किसी दूसरी प्रजाति ने नहीं किए. यही वजह रही कि वे दूसरे सरीसृपों से बेहतर होते चले गए. शोधकर्ताओं ने सांपों और छिपकलियों का वंशवृक्ष बनाया. इसके लिए उन्होंने सांपों की एक हजार प्रजातियों के जीनोम, उनके खानपान की आदतों के आंकड़ों को बना कर म्यूजियम रखे हजारों नमूनों का भी अध्ययन किया.
सभी बिना पैर के सरीसृप उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकें जो मुकाम सांपों ने हासिल किया. इसमें सबसे बड़ी बात थी सांपो के विकासक्रम में लचीलापन और पारिस्थितिकी विविधता को होना. जमीन के अंदर बिल बनाने की क्षमता, महासागरों से लेकर साफ पानी में रह पाना, उन्होंने खुद को हर जगह पर रहने के लायक बनाया. सांपों ने अपने विकासक्रम में खुद को कई अहम चीजों के लिए ढाला और एक शानदार विविधता हासिल की.
सांप हर तरह का शिकार करने में सक्षम होते चले गए .उन्होंने समय के साथ अपनी खुराक तक में बदलाव किए. और फिर भी एक शक्तिशाली शिकारी जानवर के रूप में खुद को स्थापित करने में सफल रहे. शोधकर्ताओं ने बताया कि किस तरह खुराक में बदलाव उन्हें समय के साथ चलने में मदद करता रहा.





