भारत SCO मेंबर बनते ही पाकिस्तान पर करेगा भीषण बमबारी, एक साथ 6 देश करेंगे हमला

बीजिंग. भारत और पाकिस्तान अगले हफ्ते अस्ताना समिट में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के परमानेंट मेंबर बन जाएंगे। यह आॅर्गनाइजेशन चीन के सपोर्ट वाला है और खुद चीन ने यह बात कही है। यह दुनिया का पहला मिलिट्री को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन है। एक्सपर्ट के मुताबिक इसका मेंबर बनने के बाद अगर पाकिस्तान भारत पर हमला कर दे तो चीन-रूस समेत इसके बाकी 4 मेंबर्स को भारत का साथ देना होगा। बता दें कि कजाकिस्तान के अस्ताना शहर में 8 और 9 जून को एससीओ की समिट होने वाली है।

भारत SCO मेंबर- चीन ने कहा- सब बढ़िया चल रहा है
– चीन के विदेश मंत्रालय की स्पोक्सपर्सन ह्यूआ चुनयिंग ने कहा, “एससीओ की मेंबर कंट्रीज इन दोनों देशों (भारत-पाक) के साथ एमओयू करने की प्रॉसिजर आगे बढ़ा रहे हैं और सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा है।”
– उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि अस्ताना सम्मेलन में इन दोनों देशों को एससीओ में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. अस्ताना सम्मेलन 8-9 जून को होना है।”
– उधर, रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा है कि अस्ताना समिट में भारत एससीओ का परमानेंट मेंबर बनेगा।
2001 में बना था SCO
– बता दें कि एससीओ एक पॉलिटिकल और सिक्युरिटी ग्रुप है। इसका हेडक्वार्टर बीजिंग में है। यह 2001 में बनाया गया था।
– चीन, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान इसके परमानेंट मेंबर हैं।
– यह ऑर्गनाइजेशन खासतौर पर मेंबर कंट्रीज के बीच मिलिट्री को-ऑपरेशन के लिए बनाया गया है।
– इसमें खुफिया जानकारियों को साझा करना और सेंट्रल एशिया में आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाना शामिल है।
– भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया एससीओ में सुपरवाइजर कंट्री हैं।
– बता दें कि एससीओ एक पॉलिटिकल और सिक्युरिटी ग्रुप है। इसका हेडक्वार्टर बीजिंग में है। यह 2001 में बनाया गया था।
– चीन, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान इसके परमानेंट मेंबर हैं।
– यह ऑर्गनाइजेशन खासतौर पर मेंबर कंट्रीज के बीच मिलिट्री को-ऑपरेशन के लिए बनाया गया है।
– इसमें खुफिया जानकारियों को साझा करना और सेंट्रल एशिया में आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाना शामिल है।
– भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया एससीओ में सुपरवाइजर कंट्री हैं।
दो साल पहले शुरू हुई थी प्रॉसेस
– बता दें कि 2015 में रूस के उफा में एससीओ समिट हुई थी। इसमें भारत-पाकिस्तान को इस ऑर्गनाइजेशन में परमानेंट मेंबर के तौर पर शामिल किए जाने का प्रपोजल पास किया गया था।
– बता दें कि 2015 में रूस के उफा में एससीओ समिट हुई थी। इसमें भारत-पाकिस्तान को इस ऑर्गनाइजेशन में परमानेंट मेंबर के तौर पर शामिल किए जाने का प्रपोजल पास किया गया था।
– 2016 में एसीओ समिट रूस के ताशकंद में हुई थी। इसमें भारत और पाकिस्तान ने एसीओ में शामिल होने के लिए कमिटमेंट मेमोरेंडम पर साइन किए थे।
– चीन ने उम्मीद जताई है कि एससीओ का परमानेंट मेंबर बनने से भारत-पाक के बाइलेटरल रिलेशन भी सुधरेंगे।
#फायदे
– “यह दुनिया का पहला मिलिट्री, पॉलिटिकली और इकोनॉमिकली को-ऑपेरशन वाला ऑर्गनाइजेशन है। इसमें शामिल होने के यह मायने हैं कि अगर कोई देश इन मेंबर कंट्रीज में से किसी पर सैन्य हमला करता है तो ऑर्गनाइजेशन के सभी देश मिलकर उसका जवाब देंगे।” बाहर का देश अगर हमला करे तो ऑर्गनाइजेशन पर हमला माना जाएगा।
– “अगर पाकिस्तान भारत पर हमला कर दे तो उसके खिलाफ बाकी देश भारत की मदद करेंगे। हालांकि, यह तभी होगा, जब कोई देश डायरेक्ट किसी दूसरे देश पर अटैक करे। आतंकी घटनाओं और घुसपैठ के मामलों में मदद नहीं की जाएगी।”
– “चीन से रूस तक नेचुरल रिसोर्स बेल्ट है। ऐसे में एससीओ का मेंबर बनने से भारत उस कॉमन इकोनॉमी का हिस्सा बनेगा।”
– “यह दुनिया का पहला मिलिट्री, पॉलिटिकली और इकोनॉमिकली को-ऑपेरशन वाला ऑर्गनाइजेशन है। इसमें शामिल होने के यह मायने हैं कि अगर कोई देश इन मेंबर कंट्रीज में से किसी पर सैन्य हमला करता है तो ऑर्गनाइजेशन के सभी देश मिलकर उसका जवाब देंगे।” बाहर का देश अगर हमला करे तो ऑर्गनाइजेशन पर हमला माना जाएगा।
– “अगर पाकिस्तान भारत पर हमला कर दे तो उसके खिलाफ बाकी देश भारत की मदद करेंगे। हालांकि, यह तभी होगा, जब कोई देश डायरेक्ट किसी दूसरे देश पर अटैक करे। आतंकी घटनाओं और घुसपैठ के मामलों में मदद नहीं की जाएगी।”
– “चीन से रूस तक नेचुरल रिसोर्स बेल्ट है। ऐसे में एससीओ का मेंबर बनने से भारत उस कॉमन इकोनॉमी का हिस्सा बनेगा।”
– “एससीओ में शामिल होना साबित करता है कि हमारी अहमियत बढ़ी है। कॉम्पटीशन भी बढ़ता है।”
#चुनौतियां
– “चीन साउथ एशिया का हिस्सा नहीं है। इसके बाद भी पाकिस्तान उसे सार्क (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन) का हिस्सा बनाने पर जोर देता रहा है। भारत इसका विरोध करता है।
– “एससीओ सेंट्रल एशिया की कंट्रीज का ऑर्गनाइजेशन है। भारत साउथ एशिया में है। चीन इसी आधार पर उसे एससीओ में शामिल करने का विराेध करता था। अब भारत चीन को सार्क में शामिल करने का विरोध नहीं कर पाएगा।”
– “चीन साउथ एशिया का हिस्सा नहीं है। इसके बाद भी पाकिस्तान उसे सार्क (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन) का हिस्सा बनाने पर जोर देता रहा है। भारत इसका विरोध करता है।
– “एससीओ सेंट्रल एशिया की कंट्रीज का ऑर्गनाइजेशन है। भारत साउथ एशिया में है। चीन इसी आधार पर उसे एससीओ में शामिल करने का विराेध करता था। अब भारत चीन को सार्क में शामिल करने का विरोध नहीं कर पाएगा।”





