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बेमिसाल: स्‍कूलों में अब पढ़ाएंगे रोबोट, विश्‍वास नहीं तो हाजिर है ‘नीनो’, जानिए

पटना। अक्सर महिलाओं को तकनीक के मामले में कमतर आंका जाता है लेकिन पटना की अाकांक्षा आनंद इस अवधारणा को किनारे रखकर राज्य का नाम ऊंचा कर रही हैं। अाकांक्षा ने ऐसा ह्यूमेनॉइड रोबोट ‘नीनो’ बनाया है जो राजधानी के बच्चों को पढ़ाएगा। अप्रैल 2018 से पटना के दस स्कूलोें में नीनो रोबोट बच्चों को पढ़ाना शुरू कर देगा। शहर के पांच स्कूल और राज्य के आठ स्कूल में अाकांक्षा का रोबोट लांच हो चुका है। उनका यह रोबोट देश का ऐसा पहला रोबोट है जो खुद से घूम सकता है, छू कर किसी को पहचान सकता है और नाच-गा भी सकता है।

प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा

आकांक्षा आनंद मूल रूप से पटना के आइएएस कॉलोनी की रहने वाली हैं। बचपन से वह अपने दादा और पिता को देखकर आइएएस बनने के सपने देखती थीं। आकांक्षा बताती हैं, जब से उन्होंने आंखें खोली बस आइएएस बनने का सपना देखा लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डीएसपी पिता आनंद प्रकाश और एलएलबी मां आरती प्रकाश को देखकर उन्हें खूब पढऩे की इच्छा होती थी।

अपनी प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा डीएवी खगौल से पूरी के बाद उन्होंने बंगलुरु की तरफ रुख किया। प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए उन्होंने पहले इंजीनियरिंग की राह चुनी। इस क्षेत्र में उनका इतना मन लग गया कि वह दिन दूनी रात चौगुनी रमती गईं। इसी दौरान आकांक्षा ने बंगलुरु की सिरेना कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। अकांक्षा ने यहीं देश का पहला ऐसा ह्यूमेनॉइड  रोबोट बना दिया जो खुद से चल सकता है।

जापान के बच्चों से आया ‘नीनो’ का आइडिया

आकांक्षा बताती हैं, उनको ‘नीनो’ बनाने का आइडिया तब आया जब वह अपने जॉब के सिलसिले में जापान गईं थीं। वहां देखा कि दस साल के बच्चे खुद से रिमोट कंट्रोल वाली कार और खिलौने बनाना सीख रहे हैं। वह खुद से अपने खिलौने बना ले रहे थे। जापान के बच्चों को देखकर मुझे अपने बचपन के दिन याद आ गए।

हमलोग खिलौने खरीदते तो हैं लेकिन खराब हो जाने पर फेंक देते हैं। उसकी तकनीकी चीजों को हमारे परिजन समझने भी नहीं देते हैं जबकि जापान में ऐसा नहीं है। वहां इतनी कम उम्र में ही तकनीकों के बारे में बच्चों को जानकारी दी जाती है। इसलिए वह देश तकनीकी रूप से उन्नत हैं।

अाकांक्षा ने ठाना कि ऐसा रोबोट बनाउंगी जो बच्चों को तकनीकी रूप से ट्रेन कर देगा। अाकांक्षा कहती हैं कि बिहार के बच्चे मार्क्स तो ले आते हैं लेकिन वह तकनीक में पीछे छूट जाते हैं। इसलिए इस रोबोट को स्कूल के लिए बनाया ताकि बिहार दुनिया के साथ कदम से कदम मिला सके। इनका यह रोबोट शहर के पांच स्कूल में ‘स्किप (सिरेना नॉलेज एंड इन्फार्मेशन प्रोग्राम) के तहत बच्चों को पढ़ा रहा है।

अाकांक्षा बताती हैं, जापान की बात मेरे दिमाग में पैठ कर चुकी थी। मुझे लग रहा था मेरी तकनीकी पढ़ाई ऐसे ही व्यर्थ चली जाएगी अगर मैने रोबोट नहीं बनाया। 

मानवीय भावनाओं के साथ पढ़ाता है ‘नीनो’

अकांक्षा कहती हैं, रोबोट मानवीय भावनाओं के साथ पढ़ाता है। इसके सॉफ्टवेयर में जरूरत होती है तो बस सिलेबस फीड करने की। फिर यह न सिर्फ उसी अंदाज में बच्चों को पढ़ाता है बल्कि उसे चैप्टर रिवाइज भी करवाता है।

आकांक्षा बताती हैं कि इससे हमारे बच्चे तकनीक से जुड़ेंगे तो देश भी आगे बढ़ेगा। यह इंसान की तरह बात भी करता है, घूमता भी है और डांस भी करता है। ‘नीनो’ की सबसे बड़ी खासियत है कि यह आपको पहचान भी सकता है।

 
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