SC में अब महिला वकील चिल्लाई, जस्टिस सीकरी बोले- चिल्लाकर बात करने वालों से मुझे एलर्जी है

नई दिल्ली.शांत स्वभाव वाले सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एके सीकरी बुधवार को एक महिला वकील के रवैये पर पर नाराज हो गए। वकील को फटकारते हुए उन्होंने कहा कि मैं धैर्यवान जज हूं, लेकिन मुझे चिल्लाकर बात करने वाले वकीलों से एलर्जी है। किसी वकील का ऐसा बर्ताव कोर्ट के अनुशासन और डेकोरम के लिए बड़ा खतरा है। इस तरह चिल्लाने वाले वकीलों पर कठोर कदम उठाने का सही वक्त आ गया है। इतना कहकर उन्होंने सुनवाई फरवरी तक स्थगित कर दी।नई दिल्ली.शांत स्वभाव वाले सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एके सीकरी बुधवार को एक महिला वकील के रवैये पर पर नाराज हो गए। वकील को फटकारते हुए उन्होंने कहा कि मैं धैर्यवान जज हूं, लेकिन मुझे चिल्लाकर बात करने वाले वकीलों से एलर्जी है। किसी वकील का ऐसा बर्ताव कोर्ट के अनुशासन और डेकोरम के लिए बड़ा खतरा है। इस तरह चिल्लाने वाले वकीलों पर कठोर कदम उठाने का सही वक्त आ गया है। इतना कहकर उन्होंने सुनवाई फरवरी तक स्थगित कर दी।  कोर्ट के टोकने पर भी महिला बोलती रही - दरअसल, जस्टिस सीकरी की बेंच सुब्रत चटर्जी बनाम सेबी केस सुन रही थी। सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी, प्रताप वेणुगोपाल, महेश अग्रवाल और पराग त्रिपाठी भी सुनवाई में मौजूद थे। जब पराग त्रिपाठी दलीलें रख रहे थे, तभी वकीलों के बीच खड़ी एक महिला ने चिल्लाते हुए कहा कि उन्हें दलीलें रखने का हक नहीं है। - कोर्ट के टोकने पर भी महिला बोलती रही। इस पर जस्टिस सीकरी ने महिला को फटकार लगाई। धवन ने ले लिया था वकालत से संन्यास - सुप्रीम कोर्ट में वकीलों के चिल्लाने की यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ दिनों से ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। - 5 दिसंबर को अयोध्या विवाद और 6 दिसंबर को दिल्ली सरकार के केस में सीनियर एडवोकेट राजीव धवन ने चिल्लाकर दलीलें रखी थीं। - चीफ जस्टिस ने इस पर आपत्ति जताते हुए 8 दिसंबर को सख्त कमेंट्स किए थे। इसे अपमान बता धवन ने वकालत से संन्यास ले लिया। सुप्रीम कोर्ट को जुर्माना लगाने से दर्जा छीनने तक का अधिकार सीनियर एडवोकेट जयंत सूद के मुताबिक, कोर्ट के पास ऐसे वकीलों के खिलाफ कार्रवाई के कानूनी अधिकार हैं। तीन तरह की कार्रवाई मुमकिन है। 1. ऐसा लगे कि वकील के रवैये से कंटेम्प्ट हुई है तो उसके खिलाफ कंटेम्प्ट की कार्रवाई की जा सकती है। जुर्माना भी लगाना मुमकिन है। 2. रवैया खराब रहा हो तो कोर्ट बार एसोसिएशन और बार काउंसिल को वकील पर अनुशासनात्मक (Disciplinary) कार्रवाई का आदेश दे सकता है। 3. कोर्ट एडवोकेट से सीनियर का दर्जा वापस ले सकता है। फैसला फुल कोर्ट बेंच कर सकती है। SC में जजों से चिल्लाकर बात करने की घटनाएं 2014: सहारा-सेबी विवाद में तत्कालीन जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस जेएस खेहर की कोर्ट के सामने राजीव धवन ने चिल्लाकर दलीलें रखीं। दोनों जजों ने उन्हें फटकारा था। 22 अक्टूबर 2016: उस वक्त के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर के सामने मैथ्यू जे नेदुम्पारा ने वकीलों की सीनियरिटी के मुद्दे पर चिल्लाकर बात रखी। ठाकुर ने कहा कि चुप रहिए। यह कोर्ट है, मछली बाजार नहीं। 2016: सहारा-सेबी केस में राजीव धवन और तब के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर से कहा-सुनी हुई। ठाकुर ने चेतावनी दी कि खराब व्यवहार के कारण उनका सीनियर का दर्जा वापस लेने पर विचार कर सकते हैं। 16 मई 2017:तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर की कोर्ट में एक महिला वकील रेणुका ने चिल्लाकर कहा कि उनके पास जजों के खिलाफ सबूत हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट में उनकी एंट्री बैन कर दी गई।

कोर्ट के टोकने पर भी महिला बोलती रही
– दरअसल, जस्टिस सीकरी की बेंच सुब्रत चटर्जी बनाम सेबी केस सुन रही थी। सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी, प्रताप वेणुगोपाल, महेश अग्रवाल और पराग त्रिपाठी भी सुनवाई में मौजूद थे। जब पराग त्रिपाठी दलीलें रख रहे थे, तभी वकीलों के बीच खड़ी एक महिला ने चिल्लाते हुए कहा कि उन्हें दलीलें रखने का हक नहीं है।

– कोर्ट के टोकने पर भी महिला बोलती रही। इस पर जस्टिस सीकरी ने महिला को फटकार लगाई।

धवन ने ले लिया था वकालत से संन्यास

– सुप्रीम कोर्ट में वकीलों के चिल्लाने की यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ दिनों से ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।

– 5 दिसंबर को अयोध्या विवाद और 6 दिसंबर को दिल्ली सरकार के केस में सीनियर एडवोकेट राजीव धवन ने चिल्लाकर दलीलें रखी थीं।

– चीफ जस्टिस ने इस पर आपत्ति जताते हुए 8 दिसंबर को सख्त कमेंट्स किए थे। इसे अपमान बता धवन ने वकालत से संन्यास ले लिया।

सुप्रीम कोर्ट को जुर्माना लगाने से दर्जा छीनने तक का अधिकार
सीनियर एडवोकेट जयंत सूद के मुताबिक, कोर्ट के पास ऐसे वकीलों के खिलाफ कार्रवाई के कानूनी अधिकार हैं। तीन तरह की कार्रवाई मुमकिन है।
1. ऐसा लगे कि वकील के रवैये से कंटेम्प्ट हुई है तो उसके खिलाफ कंटेम्प्ट की कार्रवाई की जा सकती है। जुर्माना भी लगाना मुमकिन है।
2. रवैया खराब रहा हो तो कोर्ट बार एसोसिएशन और बार काउंसिल को वकील पर अनुशासनात्मक (Disciplinary) कार्रवाई का आदेश दे सकता है।
3. कोर्ट एडवोकेट से सीनियर का दर्जा वापस ले सकता है। फैसला फुल कोर्ट बेंच कर सकती है।

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SC में जजों से चिल्लाकर बात करने की घटनाएं

2014: सहारा-सेबी विवाद में तत्कालीन जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस जेएस खेहर की कोर्ट के सामने राजीव धवन ने चिल्लाकर दलीलें रखीं। दोनों जजों ने उन्हें फटकारा था।

22 अक्टूबर 2016: उस वक्त के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर के सामने मैथ्यू जे नेदुम्पारा ने वकीलों की सीनियरिटी के मुद्दे पर चिल्लाकर बात रखी। ठाकुर ने कहा कि चुप रहिए। यह कोर्ट है, मछली बाजार नहीं।

2016: सहारा-सेबी केस में राजीव धवन और तब के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर से कहा-सुनी हुई। ठाकुर ने चेतावनी दी कि खराब व्यवहार के कारण उनका सीनियर का दर्जा वापस लेने पर विचार कर सकते हैं।

16 मई 2017:तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर की कोर्ट में एक महिला वकील रेणुका ने चिल्लाकर कहा कि उनके पास जजों के खिलाफ सबूत हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट में उनकी एंट्री बैन कर दी गई।

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