अजमेर बाय इलेक्शन में सांवरलाल के बेटे और सचिन पायलट में जंग की तैयारी

जयपुर.अजमेर व अलवर लोकसभा सीट का उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती के तौर पर सामने आ खड़ा हुआ है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि इस अवांछनीय चुनौती को जो पार्टी ठोस रणनीति से सफलता तक ले जाएगी, उसके लिए अगले साल इन्हीं दिनों में होने वाले चुनाव की चुनौती अपेक्षाकृत आसान रहेगी। कांग्रेस अजमेर से प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलटको प्रत्याशी बनाने की तैयारी में है तो भाजपा अपने सांसद सांवरलाल जाट के निधन से खाली हुई इस सीट पर उनके बेटे रामस्वरूप लांबा को टिकट दे सकती है। अलवर लोकसभा सीट पर भाजपा चेहरा तलाश रही है, वहीं कांग्रेस पूर्व मंत्री भंवर जितेंद्र पर दांव खेल सकती है। बहरहाल, भाजपा व कांग्रेस इन सीटों को जीतने की तैयारी में अंदर ही अंदर जुटी हैं। जुटे भी क्यों नहीं, सियासत से जुड़े लोगों की नजर में ये चुनावी फाइनल से पहले का सेमीफाइनल जो माना जा रहा है। इन सीटों के अलावा मांडलगढ़ विधानसभा में भी उपचुनाव होना है। 
अजमेर बाय इलेक्शन में सांवरलाल के बेटे और सचिन पायलट में जंग की तैयारी

जानिए दोनों दलों का सियासी गणित…

कांग्रेस : पायलट का नाम इसलिए सबसे आगे लिया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस में मौजूदा परिस्थितियों में और कोई नेता इस सीट पर दमदार हैसियत में नहीं है। पायलट यहां से पहले भी सांसद रहकर केंद्र में मंत्री रह चुके हैं।
भाजपा :कांग्रेस से सचिन मैदान में उतरे तो गुर्जरों के बाद दूसरी बड़ी जाति के तौर पर जाट को उतारना भाजपा की मजबूरी है। पिता के निधन से पैदा हुई सहानुभूति को भाजपा में उनके बेटे रामस्वरूप लांबा के अलावा और कोई भुनाने में उपयुक्त नहीं होगा।

कांग्रेस के लिए दुविधा ये भी

कांग्रेस आलाकमान अगर पायलट को उतारते हैं तो वे अलवर व मांडलगढ़ उपचुनाव में प्रचार नहीं कर पाएंगे। परसेप्शन भी बन सकता है कि उन्हें एमपी का टिकट देकर प्रदेश की राजनीति से दूर किया जा रहा है। जैसा कि पूर्व सीएम गहलोत को गुजरात प्रभारी बनाने से बना हुआ है। ऐसे में पूर्व जिला प्रमुख रामस्वरूप चौधरी व पूर्व एमएलए नाथूराम सिणोदिया के नाम भी लिए जा रहे हैं।

अलवर लोकसभा सीट

कांग्रेस : भंवर जितेंद्र सिंह दमदार चेहरा माने जा रहे हैं। भाजपा के विधायक-मंत्रियों की एंटीइंकबेंसी को वोटों में बदलने के लिए वे भी मजबूत प्रत्याशी साबित होंगे।
भाजपा : पार्टी के पास अभी दमदार चेहरा नहीं दिख रहा। एक कलेक्टर व एक विभाग में कमिश्नर यादव आईएएस अफसरों के नाम भी चल रहे हैं।

यहां भाजपा के लिए दुविधा

अलवर का सियासी इतिहास है कि यहां अकसर यादव व नॉन यादव में भिड़ंत हुई है। जितेंद्र मैदान में आए तो भाजपा के लिए यादव को उतारना जरूरी होगा। मंत्री जसवंत यादव के परिवार से प्रत्याशी बनाने से वंशवाद को बढ़ावा देने के आरोपों का खतरा है। ऐसे में महंत चांदनाथ के निधन से खाली इस सीट पर संत भी उतार सकती है।
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