टैक्स घटते ही प्रदेश के सीमा क्षेत्रों में बढ़ी डीजल की बिक्री
भोपाल.पिछले एक दशक में पहली बार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाने वाली राज्य सरकार का राजस्व घटने का अनुमान गलत साबित हो सकता है। जिस तेजी से मप्र में डीजल की बिक्री में इजाफा हो रहा है। उसे देखकर लगता है कि साल की दूसरी छमाही में सरकार की डीजल बिक्री 1.25 करोड़ रुपए लीटर से करीब 20% बढ़कर 1.75 करोड़ रुपए लीटर रोजाना हो जाएगी।

महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे इलाकों के पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री पिछले हफ्ते एकदम से 25 से 30 फीसदी तक बढ़ी है। पेट्रोल पंप संचालक अनुमान लगा रहे हैं कि अगले एक माह में सीमावर्ती इलाकों और हाईवे पर बिकने वाले डीजल की बिक्री में औसतन 20% बिक्री बढ़ेगी। इस हिसाब से मप्र सरकार पिछले साल के 9160 करोड़ रुपए के राजस्व को भी पार कर सकती है। वित्त मंत्री जयंत मलैया का कहना है कि सरकार ने टैक्स घटाने के पहले ही नुकसान का आकलन कर लिया था। रही बात डीजल की बिक्री से होने वाली भरपाई का तो यह स्थिति नवंबर के बाद ही साफ हो पाएगी।
4600 करोड़ मिलने का अनुमान
– सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स 38.90% से घटाकर 35.90% कर दिया है। फिर भी सरकार को 31 मार्च 2018 तक 1900 करोड़ का राजस्व मिल सकता है। वहीं डीजल की बिक्री 1.25 करोड़ लीटर से बढ़कर 1.75 करोड़ लीटर होने की संभावना जताई जा रही है। बढ़ी बिक्री के आधार पर सरकार को 1 नवंबर से 31 मार्च 2018 तक 151 दिनों में 2700 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है।
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तीन साल में पेट्रोल पर 11.90 और डीजल पर 7.24% टैक्स बढ़ा
– मप्र सरकार ने 3 साल में पेट्रोल पर 5 बार और डीजल पर तीन बार टैक्स बढ़ाया। इस दौरान पेट्रोल पर 11.90% और डीजल पर 7.24% टैक्स बढ़ा। नतीजतन 2014-15 से 2015-16 के बीच महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में पेट्रो पदार्थों से होने वाली आय में कमी आई थी। इसके बाद मप्र को देखते हुए अन्य राज्यों ने टैक्स बढ़ाया। इन तीन सालों में देशभर में पेट्रो पदार्थों से मिलने वाला राजस्व 21.30% बढ़ा।
– टैक्स घटने के बाद डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी हो रही है। कई पंप संचालक ऐसे हैं जो पहले 10.50 हजार लीटर डीजल बेच रहे थे। अब वे 15,000 लीटर बेच रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में भी डीजल की बिक्री बढ़ी है। ऐसे में सरकार का टैक्स कलेक्शन घटने का अनुमान तर्कसंगत नहीं है।





