RBI दिव्यांगों के लिए चार फीसदी पद आरक्षित रखने पर राजी,

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया दिव्यांगों के लिए कानून के मुताबिक चार प्रतिशत पद आरक्षित रखने पर राजी हो गया है। सोमवार को आरबीआई की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वी. धोंड ने हाईकोर्ट को बताया- हमने पुराने कानून के तहत दिव्यांगों के लिए तीन प्रतिशत पद आरक्षित किए थे। अब यह बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिए जाएंगे।
बचे आरक्षित पदों के लिए जनवरी में अलग से विज्ञापन जारी किया जाएगा। इसके लिए अलग से भर्ती प्रक्रिया होगी। इस पर न्यायमूर्ति शांतनु केमकर व न्यायमूर्ति गिरीष कुलकर्णी की खंडपीठ ने आरबीआई को नियुक्ति के लिए जरूरी प्रक्रिया समय सारिणी के हिसाब से शुरू करने की अनुमति दे दी। सामाजिक कार्यकर्ता राजू वाघमारे ने अधिवक्ता मिनाज के मार्फत हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
यह कहा था याचिका में
याचिका के अनुसार आरबीआई ने पिछले दिनों 623 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। पर्सन विथ डिसेबिलिटी एक्ट 2016 के मुताबिक कुल पदों में से 4 प्रतिशत पद दिव्यांगों के लिए आरक्षित किए जाने चाहिए थे। लेकिन आबीआई ने सिर्फ तीन प्रतिशत पद ही आरक्षित किए, जो नियमों के खिलाफ है। याचिका के मुताबिक दिव्यांगों के लिए बनाए गए नए कानून के मुताबिक एसिड हमले के शिकार, मानसिक रूप से कमजोर, कुष्ठ रोग से ठीक हुए लोगों के अलावा अन्य लोगों को भी दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल किया गया है।
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आरबीआई ने नेत्रहीन, मूक-बधिर व शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को ही दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल किया है।
यह नए कानून के प्रावधानों के खिलाफ है। लिहाजा आरबीआई को निर्देश दिया जाए कि दिव्यांगों की श्रेणी में एसिड हमले के शिकार व दूसरे लोगों को भी शामिल किए जाए अौर चार प्रतिशत पद विकलांगों के लिए आरक्षित किए जाए।





