Ramadan 2019:रमजान के महीना , जानें रोजे रखने के नियम
इस्लाम धर्म में रोजा रखने का एक अलग महत्व होता है। इस्लाम धर्म में रोजा रखने का मतलब होता है खुदा की इबादत करना। रोजा रखने के कई आध्यात्मिक फायदे भी होते हैं। जैसे सही समय पर भोजन करने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कहते हैं रमजान के दौरान रोजा रखने वाले लोगों का विश्वास खुदा पर पहले से ज्यादा बढ़ जाता है। दिल से मांगी गई दुआ इस महीने में कबूल की जाती है। एक महीने तक रोजा रखने के बाद लोग ईद का त्योहार मनाते हैं।

रमजान के महीने में सख्त नियम का पालन किया जाता है। आपके एक गलती से रोजा टूट जाता है। रोजा रखने के दौरान खाने के बारे में भी नहीं सोचा जाता है। पूरे दिन अपने मन को साफ रखना होता है। इसके साथ ही किसी की बुराई और किसी के बदनामी के बारे में भी नहीं सोचा जाता है। रोजा रखने वाले लोग अपने मन को साफ रखते हैं। अगर कोई गलती से किसी के बारे में गलत सोचता है तो उसके रोजा का फल उसे नहीं मिलता है।
रमजान के पाक महीने में पूरे दिनभर में पांच बार कुरान पढ़ने का नियम है। सूर्योदय से पहले ही सहरी खाने का नियम है। यानी सूरज निकले सेे पहले भोजन करना होता है। इसके बाद ना खाना खाया जाता है और ना ही पानी पिया जा सकता।
सूरज अस्त के बाद इफ्तार करते हैं। यानी शाम ढ़लने के बाद कुछ भोजन किया जाता है। भोजन करने से पहले एक बार खुदा कि इबादत करनी होती है।
रोजा खोलने का भी एक रस्म है जिसके अनुसार खजूर खाकर ही रोजा तोड़ा जाता है और फिर दूसरी चीजें खाई जाती हैं। क्यों खजूर खाकर ही रोजा खोला जाता है। रोजे के समय दिनभर कुछ नहीं खाना होता है। ऐसे में अगर आप अचानक से ज्यादा खाना खाते हैं तो आपके शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए रोजा खोलने से पहले खजूर खाया जाता है। इससे आपके शरीर को पोषक तत्व मिलता है।




