राम रहीम को ‘बब्बर शेर’ कहते थे लोग, सजा के बाद गांव के हो गए ऐसे हालात

श्रीगंगानगर. यहां 15 दिन पहले राम रहीम के जन्मदिन के मौके पर लगा पोस्टर आज भी लगा है। इस पोस्टर में राम रहीम को बब्बर शेर बताया गया है। इसके साथ उनके जन्मदिन पर यहां बड़े जश्न की तैयारी भी की गए थी। लेकिन अब उनके गांव गुरुसर मोड़िया में सन्नाटा पसरा है। 
Ram Rahim was called 'Babbar Sher', people, after the punishment, the situation happened in the village.

जानें गांव मे कैसे हैं हालात…

– डेरामुखी गुरमीत राम रहीम को जेल होने का असर गुरुसर मोडिया में नजर आने लगा है। यहां डेरे से जुड़ी शिक्षण संस्थाओं आैर हॉस्पिटल में संख्या कम होती जा रही है।
– अकेले स्कूल-कॉलेजों की ही बात करें तो अब भी 30 फीसदी स्टूडेंट्स स्कूल नहीं आ रहे हैं वहीं हॉस्पिटल में मरीजों की संख्या आधी रह गई है।
– डेरा से जुड़े लोगों का तर्क था कि इंटरनेट बंद होने के चलते विद्यार्थियों को स्कूल खुलने का संदेश नहीं भेज पाए थे लेकिन मंगलवार देर रात इंटरनेट चालू हो गया था फिर भी अब तक पूरे छात्र-छात्रा स्कूल नहीं आए।
– उल्लेखनीय है कि दुष्कर्म मामले में डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम को इसी 28 अगस्त को पंचकूला कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई है। इससे पहले 25 अगस्त को डेरामुखी को दोषी करार दिया था और तभी से यहां डेरे से जुड़ी संस्थाओं पर असर पड़ना शुरू हो गया है। अभिभावकों में अब भी भय की स्थिति है।

अस्पताल की ओपीडी 125 से 50 पर पहुंची

– डेरा मुखी के यहां गुरुसर मोडिया में बनवाए जनरल हॉस्पिटल में ओपीडी तो घटी ही है, वार्ड तक खाली हो गए हैं।
– यहां पर आए दिन 125 या इससे अधिक ओपीडी रोजाना हो रही थी लेकिन अब विवाद के चलते इस आंकड़े में भी जबरदस्त गिरावट आई है।
– यहां अब 50 से 55 ओपीडी ही हो रही है। उधर, हॉस्पिटल के वार्ड भी खाली दिखने लगे हैं। भास्कर टीम जब हॉस्पिटल पहुंची ताे वहां कई वार्ड तो खाली थी।

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3 स्कूल, सभी में घटे विद्यार्थी

– गांव में इनकी तीन शिक्षण संस्थाएं हैं। इनमें ब्वॉयज और गर्ल्स के सीनियर सैकंडरी तक दो स्कूल हैं और एक लड़कियों का कॉलेज शामिल हैं।
– तीनों में मिलाकर 2300 से अधिक स्टूडेंट्स हैं। गर्ल्स स्कूल में 1200 के करीब छात्राएं हैं।
– लड़कों के स्कूल में 750 और छात्राओं के कॉलेज में 300 के करीब छात्राएं हैं। फिलहाल अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल-कॉलेज भेजने से भय मनाने लगे हैं। इस समय करीबन 70 प्रतिशत विद्यार्थी ही स्कूल रहे हैं।
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