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भोपाल में खुलने जा रही है रेल यूनिवर्सिटी, बनेंगे आरामदायक कोच

भोपाल। राजधानी भोपाल को आने वाले दिनों में रेल यूनिवर्सिटी, रेलवे रिसर्च सेंटर और यात्रियों को आराम देने वाले एलएचबी कोच (जर्मन कंपनी लिंक हॉफमैन बुश के सहयोग से तैयार आधुनिक कोच) बनाने वाली नई फैक्ट्री में से किसी एक की सौगात मिल सकती है।

रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि आगामी 16 अप्रैल को भोपाल में प्रस्तावित कार्यक्रम में रेल मंत्री पीयूष गोयल इनमें से किसी एक की घोषणा करेंगे। ये संस्थान राष्ट्रीय स्तर के होंगे, जो निशातपुरा रेल कोच पुन: निर्माण फैक्ट्री की खाली जमीन पर बनेंगे। इसके लिए बोर्ड स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है।

इन संस्थानों के लिए इंफ्रास्ट्रेक्चर तैयार करने फरवरी 2018 में रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के सीएमडी एससी अग्निहोत्री निशातपुरा कोच फैक्ट्री आए थे। उन्होंने खाली जमीन का मुआयना किया है। भोपाल में इन संस्थानों के बनने से रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे ही, रेलवे के विकास को भी गति मिलेगी।

निशातपुरा में रेलवे के पास 700 एकड़ से अधिक जमीन है। इसमें से करीब 20 फीसदी जमीन का रेलवे उपयोग कर पाया है। इस जमीन पर पुराने कोचों को पुन: अपग्रेड करने की फैक्ट्री है। बाकी की जमीन खाली है। जिस पर शुरू से मेडिकल कॉलेज, नय कोच बनाने की फैक्ट्री, रेलवे प्रशिक्षण संस्थान, रेलवे रिसर्च सेंटर खोलने की मांग की जा रही है।

साल 2014 में भोपाल सांसद आलोक संजर ने रेलमंत्री सुरेश प्रभु (अब तत्कालीन रेल मंत्री) को पत्र लिखा था। इसमें कोच फैक्ट्री को नए कोच उत्पादन यूनिट में बदलने, रेल यूनिवर्सिटी खोलने के सुझाव दिए थे। उन्होंने रेलमंत्री से सुझावों के संबंध में चर्चा भी की थी।

इसके अलावा वेस्ट सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज यूनियन और वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ भी फैक्ट्री को उत्पादन इकाई में बदलने की मांग करते आईं हैं। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि रेल यूनिवर्सिटी खोलने पर विचार किया जा चुका है। अप्रैल में प्रस्तावित कार्यक्रम के पहले अन्य सुझावों को भी अमल में लाया जा सकता है।

ममता बनर्जी भी कर चुकी है घोषणा

रेलमंत्री रहते ममता बनर्जी भोपाल आईं थी। तब उन्होंने खाली जमीन पर मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद कुछ नही हुआ। उन्हें भोपाल आए करीब 10 साल हो चुके हैं।

जमीन पर अभी क्या

एक कोच पुन: निर्माण फैक्ट्री है। जहाँ पर एक साल में करीब 700 पुराने कोचों को नए सिरे से अपग्रेड किया जाता है। इसके अलावा खाली जमीन पर स्क्रैप (पुराने कोचों से निकलने वाला बेकार सामान) रखा है। जिसमे आए दिन आग लग जाती है। बाकी की जमीन खाली है।

जमीन का उपयोग होगा

अभी कुछ नहीं कह सकते। लेकिन कोच फैक्ट्री की खाली जमीन का कुछ न कुछ उपयोग जरूर होगा। रेलवे इस दिशा में काम कर रहा है।

– शोभन चौधुरी, डीआरएम, भोपाल

रेल यूनिवर्सिटी खोलने की मांग की है

मैंने सितंबर 2014 में तत्कालीन रेलमंत्री को पत्र लिखा था। पत्र में रेल यूनिवर्सिटी, रेलवे के लिए रिसर्च सेंटर व मेडिकल कॉलेज खोलने, कोच पुन: निर्माण फैक्ट्री को नए कोच बनाने वाले फैक्ट्री में बदलने की मांग की थी। इनमें से कुछ मांगों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

– आलोक संजर, सांसद, भोपाल

रेल यूनिवर्सिटी की संभावना अधिक

रेल यूनिवर्सिटी खोलने व कोच पुन: निर्माण फैक्ट्री को नए कोच बनाने वाली फैक्ट्री में बदलने की संभावना अधिक है। यूनियन के जरिए हम कई बार इसकी मांग कर चुके हैं।

– रवि जायसवाल, जोनल सचिव, डब्ल्यूसीआरईयू

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