बरसाना में राधारानी के जन्मोत्सव की धूम…दर्शन के लिए उमड़ा हुजूम

मथुरा में राधाष्टमी महोत्सव की धूम रही। बरसाना में श्रद्धालुओं की हुजूम उमड़ पड़ा। बरसाना की गलियों में दूर-दूर से आए भक्त जब दिव्य दृश्य के साक्षी बने, तो हर कोई आनंदमग्न हो उठा। महिलाएं मंगलगीत गाने लगीं, संत वेदपाठ में लीन हो गए और बच्चे फुहारों में नाचने लगे।

मथुरा का बरसाना रविवार को अलौकिक दृश्य का साक्षी बना। जब राधारानी का जन्मोत्सव प्रारम्भ हुआ, तभी आसमान में उमड़े बादलों ने मानो स्वयं बधाई का बिगुल बजा दिया। वर्षा की फुहारें बूंद-बूंद अमृत बनकर बरसीं और राधारानी का अभिषेक करती प्रतीत हुईं। भक्तों ने इस अद्भुत दृश्य को देख हृदय से अनुभव किया कि प्रकृति स्वयं सेविका बन लाड़ो का श्रृंगार कर रही है।

अमृत बूंदों से हुआ अभिषेक
सुबह जैसे ही मंदिर के पट खुले, गर्भगृह से प्रस्फुटित अलौकिक प्रकाश ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उसी क्षण आकाश से झरती बूंदें राधारानी के मस्तक पर अमृत छिड़क रही थीं। सेवायत पंचामृत से अभिषेक कर रहे थे और साथ ही वर्षा का हर कण पंचामृत में घुलकर मानो आकाशीय आहुति दे रहा था। यह दृश्य देखकर भक्तों की आँखों से आँसू बहने लगे, हर कोई कह उठा ‘आज स्वर्ग धरती पर उतर आया है।’

घटाओं ने दी मंगलध्वनि
इन्द्रदेव की कृपा से उमड़े बादलों ने अपनी गर्जना से मंगलध्वनि की। मानो आकाश शंख बजा रहा हो और बूंदें मंजीरा बजा रही हों। बारिश की टपकन और भक्तों के “राधे-राधे” के जयघोष आपस में मिलकर ऐसा संगीत रच रहे थे, जिससे सम्पूर्ण धाम भक्ति रस में डूब गया।

भक्त हुए भावविभोर
बरसाना की गलियों में दूर-दूर से आए भक्त जब इस दिव्य दृश्य के साक्षी बने, तो हर कोई आनंदमग्न हो उठा। महिलाएं मंगलगीत गाने लगीं, संत वेदपाठ में लीन हो गए और बच्चे फुहारों में नाचने लगे। वृद्ध भक्तों ने इसे ईश्वरीय संकेत बताते हुए कहा ‘यह वर्षा कोई साधारण वर्षा नहीं, यह तो राधारानी के जन्म का दिव्य अभिषेक है।’

रावल में जन्मी राधा, छाया आनन्द
मथुरा के महावन राधा रानी मंदिर रावल में रविवार सुबह द्वापर युग जैसा माहौल दिखा। भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधा रानी की प्राकट्य स्थली रावल में प्राकट्य उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। दूर-दराज से आए श्रद्धालु नाचते-गाते हुए भजन कीर्तन में मस्त दिखे। हर कोई राधा रानी के प्राकट्य के दर्शन करने के लिए लालायित दिखा।

भाद्रपद की अष्टमी तिथि को वृषभानु व कीर्ति की लाडली बेटी राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। रविवार सुबह चार बजे राधा रानी का प्राकट्य होते ही मंदिर परिसर घंटे घड़ियाल व शंख ध्वनि से गूंज उठा। चारों ओर राधा रानी के जयकारों से पूरा मन्दिर गूंज उठा। भोर में मन्दिर के सेवायत पुजारी राहुल कल्ला द्वारा सुबह 4.30 बजे मंगला आरती की गई।

साढ़े पांच बजे मन्दिर के सेवायत महन्त राहुल कल्ला व अन्य संतों द्वारा 101 किलो दूध मिश्रित घी, शहद, बूरा, यमुना जल, रस, गंगाजल व पंचामृत से राधा रानी के विग्रह का अभिषेक किया गया। इसके बाद श्री राधारानी का पीतांबरी बस्त्र धारण करा श्रृंगार किया गया। श्रृंगार दर्शन से पूरा मन्दिर प्रांगण राधा रानी के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

रमणरेती आश्रम महावन से आए पीठाधीश्वर कार्ष्णि गुरुशरणानंद महाराज जी द्वारा राधारानी की आरती कर उन्हें साष्टांग प्रणाम किया गया। पूरे ब्रज में श्रद्धालु राधा रानी के प्राकट्योत्सव की भक्ति और उल्लास में डूबे रहे। देश के विभिन्न प्रांतों व रावल के आसपास के गांव से श्रद्धालु बधाई गायन करते हुए आनंद में नृत्य गायन करने लगे। बधाई महोत्सव के साथ ही हल्दी चंदन का मिश्रण उड़ेला गया। इसे भक्तों ने माथे पर लगाकर खुद को धन्य किया।

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