सुखप्रीत अपहरण केस में दस दिन से खुद उलझी हुई है पुलिस, एंगल पर शुरू की जांच

  • अमृतसर.किडनैपिंग के बाद रहस्य बन चुकी गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर सुखप्रीत कौर का अभी तक पुलिस कुछ अता-पता नहीं लगा पाई हैै, उलटा पुलिस अब खुद मामले में उलझ कर रह गई है। इस मामले पर सुखप्रीत के परिवार की तरफ से भी पुलिस को अभी तक कुछ ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। सुखप्रीत का परिवार उसके खाते में पैसे भी जमा करवाता रहा, जिसे की गैरी विर्क ने एटीएम से निकलवाए थे।
    सुखप्रीत अपहरण केस में दस दिन से खुद उलझी हुई है पुलिस, एंगल पर शुरू की जांच
    पुलिस अधिकारी भी कह रहे हैं कि पूरे मामले के पीछे कोई गहरी साजिश है, क्योंकि अभी तक जजिंदर सिंह विर्क उर्फ गैरी निवासी खरड़ को ढूंढने के लिए कार्रवाई की जा रही थी, मगर उसके भी सुसाइड करते समय खुद को इनोसेंट लिख जाने के बाद इस कहानी में नया मोड़ गया है। पुलिस सुखप्रीत कौर को ढूंढने के लिए लगातार सुभानपुर, ब्यास, जालंधर और रोपड़ में सर्च कर रही है। एडीसीपी लखबीर सिंह ने कहा कि विभिन्न पहलुओं पर जांच की जा रही है। लड़की जिंदा है भी या नहीं, सबसे पहले यह पता लगाना बेहद जरूरी है। साथ ही अब तीन एंगल पर जांच की जा रही है।

    पहला एंगल

    पहलाएंगल यह कि हो सकता है कि सुखप्रीत विर्क के साथ 11 सितंबर की शाम को यहां से गई। इसके बाद दोनों ने सुभानपुर के एक होटल में स्टे किया। यहीं से निकलने के बाद हो सकता है कि गैरी ने सुखप्रीत का कत्ल कर दिया और बाद में खुद को बचाने के लिए भागता रहा, मगर जब उसे लगा कि वह चारों तरफ से घिर चुका है तो महाराष्ट्र के एक होटल में जाकर सुसाइड कर लिया है। इसमें सवाल यह है कि अगर ऐसा हुआ तो सुखप्रीत की लाश को ढूंढना बेहद जरूरी है, जिसे ढंूढने में पुलिस लगी हुई है।

    दूसरा एंगल

    दूसराएंगल यह है कि सुखप्रीत कौर की दोस्ती 2014 में गैरी विर्क के साथ हुई थी। दोनों की शादी की बात भी चली थी। मगर बात बीच में रह गई। इसी दौरान गैरी विर्क की सगाई कहीं और हो गई। मगर सुखप्रीत कौर ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और लगातार संपर्क में रही। जब दोनों मिले तो इनका आपस में झगड़ा हो गया। सुखप्रीत कौर वहां से कहीं चली गई, मगर पुलिस उसके अपहरण के आरोप में गैरी को ढूंढ रही थी और वह डरता हुआ ही सामने नहीं रहा था।

    तीसरा एंगल

    तीसराएंगल यह है कि गैरी ने नई जगह सगाई कर ली थी, मगर सुखप्रीत कौर के साथ भी लगातार संपर्क में था। लव का ट्राएंगल चल रहा था। गैरी को अब डर सता रहा था कि वह क्या करे, क्योंकि वह सुखप्रीत के अपहरण के आरोप में वांटेड था और उसके खिलाफ पहले भी दर्ज हुए मामलों की परतें खुल रही थी, लेकिन पुलिस को अब यही उम्मीद है कि किसी तरह सुखप्रीत कौर को ढूंढा जाए तो बहुत से राज खुलेंगे।
    14 सितंबर को जब पुलिस को पता चला कि सुखप्रीत कौर किडनैप हो गई है तो सबसे पहले यूनिवर्सिटी में कमरा नंबर 20 को चेक किया। वहां से चिट्ठी मिली, जिस पर जजिंदर सिंह विर्क उर्फ गैरी का पता चला। पुलिस ने गैरी को पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। 14 सितंबर से लेकर 20 सितंबर तक पुलिस लगातार गैरी का पीछा करती रही।

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    पहले उसे रोपड़, फिर पंचकूला, दिल्ली इसके बाद जयपुर टोल-प्लाजा पर स्पाट किया गया। पुलिस इसी थ्यूरी पर काम कर रही थी कि अगर गैरी पकड़ा गया तो पूरा मामला क्लियर हो जाएगा, मगर 20 सितंबर को गैरी के सुसाइड करने की बात सामने आई तो पूरा केस ही बदल गया। अब पुलिस सुखप्रीत कौर को ढूंढ रही है। यह भी क्लियर नहीं है कि वह अभी जिंदा है भी या नहीं, क्योंकि पुलिस के मुताबिक वह जालंधर से रोपड़ के बीच ही रही है। इसके आगे हर जगह गैरी अकेला ही स्पाट होता रहा है।
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