भागवत गीता को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका

तीन सामाजिक संगठनों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर श्रीमद् भगवद् गीता को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने और कॉलेज में शोध का विषय बनाने की मांग की है। कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर बहस के लिए 15 जनवरी को रखने का आदेश दिया है।

भागवत गीता

अखिल भारतीय मलियाली संघ के अध्यक्ष एसके मेनन, सामाजिक संगठन अक्षर ज्योति व वीर वीरांगना भोपाल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि श्रीमद् भगवद् गीता धार्मिक ग्रंथ ही नहीं बल्कि एक पूर्ण जीवन शास्त्र है।

इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन से जुड़े उपदेश दिए हैं। इसमें परमात्मा की शक्ति को बताया गया है। गीता को स्कूल व कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं करने से लोग इस ज्ञान से वंचित हो रहे हैं। याचिका में इस ग्रंथ को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने के उपरांत कॉलेज में शोध का विषय बनाने की मांग की गई है।

साथ ही बताया गया है कि अमेरिका के एक विश्वविद्यालय ने गीता को पाठ्यक्रम में शामिल कर अनिवार्य विषय किया है। जब विदेश में भीमद् भगवद् गीता को अनिवार्य किया है तो भारत में भी होना चाहिए।

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हाईकोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए मामले को बहस के लिए 15 जनवरी को रखने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से श्रीमद् भगवद् गीता की प्रति, उसके उद्देश्य सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है।

गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग को लेकर संभवतः पहली बार देश के किसी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एसके मेनन, किरण अग्रवाल व चंद्रप्रभा पैरवी कर रहे हैं।

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