प्लास्टिक और थर्मोकोल पर प्रतिबंध के लिए आएगा अध्यादेश

लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार पॉलीथिन, प्लास्टिक व थर्मोकोल पर प्रतिबंध लगाने के लिए अध्यादेश लाने जा रही है। यह अध्यादेश नगर विकास विभाग ला रहा है। इसमें न सिर्फ इनकी बिक्री बल्कि इनके उपयोग पर भी दंड का प्रावधान किया जा रहा है। सबसे ज्यादा फोकस इस निर्णय के जमीनी स्तर पर लागू करने पर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में चरणवार ढंग से सभी प्रकार की पॉलीथिन, प्लास्टिक व थर्मोकोल के कप-प्लेट-ग्लास आदि पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।

सबसे पहले 15 जुलाई से 50 माइक्रोन से कम की पॉलीथिन प्रतिबंधित की जा रही हैं। इसके बाद 15 अगस्त से प्लास्टिक व थर्मोकोल के कप-प्लेट व ग्लास प्रतिबंधित किए जाएंगे। अंत में दो अक्टूबर से सभी प्रकार के पॉलीबैग प्रतिबंधित करने की योजना है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अब नगर विकास विभाग इसकी तैयारियों में जुट गया है। विभाग इस मामले में दोनों तरह की तैयारी में लगा है। 15 जुलाई से पहले यदि अध्यादेश फाइनल नहीं हो पाया तो विभाग पहले चरण के लिए शासनादेश जारी करेगा। इसमें 50 माइक्रोन तक की पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाना है। इसके लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 18 मार्च, 2016 की अधिसूचना का सहारा लिया जाएगा।

इसलिए अध्यादेश लाना जरूरी

प्रदेश में प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा (उपयोग और निस्तारण का विनियमन) अधिनियम 2000 लागू है। इसमें 20 माइक्रोन से कम की पॉलीथिन के उपयोग पर ही प्रतिबंध की बात है। लेकिन, मुख्यमंत्री ने पॉलीथिन के साथ ही थर्मोकोल व प्लास्टिक पर भी प्रतिबंध के आदेश दिए हैं। ऐसे में नगर विकास विभाग को अपने कूड़ा कचरा अधिनियम में संशोधन करना होगा। इसी संशोधन के लिए सरकार अध्यादेश लाने जा रही है। बगैर अध्यादेश के इस पर प्रभावी ढंग से प्रतिबंध नहीं लग सकता है।

जितनी बड़ी दुकान उतना अधिक लगेगा जुर्माना

प्रदेश सरकार पॉलीथिन पर प्रतिबंध के लिए इस बार जो अध्यादेश लाने जा रही है उसमें जितनी बड़ी दुकान उतना अधिक जुर्माने का प्रावधान रखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जुर्माने की राशि 10 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक है, जबकि पॉलीथिन का इस्तेमाल करने वालों से एक हजार रुपये लेकर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूलने की व्यवस्था की जा रही है। 

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