कोटा में बना देश का पहला ऑनलाइन मेमोरियल, 12 हजार शहीदों की है जानकारी

कोटा(राजस्थान).एयरफोर्स में विंग कमांडर के पद से रिटायर तीन दोस्तों ने देश का पहला ऑनलाइन मेमोरियल बनाया है। कहा जा रहा है कि इस पर शहीद जवानों की जितनी जानकारियां हैं, उतनी तो खुद सरकार के पास भी नहीं है। इन्होंने शहीदों की यादों को बेहतर ढंग से संजोया है। ये तीनों दोस्त हैं- बेंगलुरु के अफराज, बिहार के राजेंद्र प्रसाद और एलके चौबे।
कोटा में बना देश का पहला ऑनलाइन मेमोरियल, 12 हजार शहीदों की है जानकारी
– एयरफोर्स में 20 से 25 साल सेवा देने के बाद तीनों रिटायर हुए तो देश के लिए शहीद होने वाले सैनिकों के लिए कुछ करना चाहते थे। लंबी रिसर्च के बाद इन्हें पता चला कि इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में शहीदों के लिए ऑनलाइन मेमोरियल होता है, जहां लोग शहीदों के बारे में जान पाते हैं। बस, इसी विचार को धरातल पर उतारने में तीनों जी-जान से जुट गए। कई एक्सपर्ट की मदद ली, दो साल तक आर्म्ड फोर्सेज से जुड़ी सैकड़ों किताबें खंगाली।
– यही नहीं उन्होंने जल-थल-वायु सेना की वेबसाइट से जानकारियां जुटाई, सैकड़ों शहीदों के परिवारों से व्यक्तिगत संपर्क किया। इसी साल अप्रैल में www.honourpoint.in नाम से एक ऑनलाइन मेमोरियल लॉन्च कर दिया। इस पोर्टल पर अब तक 12,438 शहीदों के बारे में संपूर्ण जानकारी अपडेट की जा चुकी है। इसमें 1947 से अब तक के ज्यादातर शहीद शामिल हैं। पोर्टल नियमित अपडेट किया जा रहा है।
– कुछ शहीदों की प्रोफाइल तो खुद उनके परिजन मेंटेन कर रहे हैं। हजारों लोग यहां अपने रियल हीरोज को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अफराज ने भास्कर को इस पूरी योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
– उन्होंने बताया कि किसी भी शहीद को कुछ ही समय में सभी भूल जाते हैं। यदि किसी जगह उनकी याद में स्मारक भी बनाया जाता है तो वहां सभी लोगों की हिस्ट्री नहीं मिल पाती। ऐसे में ऑनलाइन मेमोरियल बना दिया। इसके लिए हमने बेंगलुरु में ऑफिस खोला है, जहां 11 तकनीकी एक्सपर्ट काम करते हैं।

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– तीनों दोस्त अब तक इस पोर्टल को तैयार करने पर 30 लाख रुपए खर्च कर चुके हैं, एक पैसा किसी से नहीं लिया है। अफराज कहते हैं कि हमने इस मेमोरियल के माध्यम से शहीदों के बारे में जो जितनी जानकारी उपलब्ध कराई है, उतनी सेना की उन यूनिटों के पास भी नहीं है, जहां वे तैनात थे।
– देश में औसतन प्रत्येक तीसरे दिन एक सैनिक शहीद होता है। इन शहीदों की प्रेरणादायक कहानियां भी पोर्टल पर उपलब्ध हैं। अब इससे शहीदों के परिवार भी जुड़ रहे हैं।
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