सीएम योगी पर सोनभद्र के सांसद ने लगाया ये बड़ा आरोप

विपक्षियों की आलोचना झेल रहे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को अब उनकी ही पार्टी के सांसद ने निशाने पर लिया है। सोनभद्र के भाजपा सांसद छोटेलाल खरवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर स्वयं को डांटकर भगाने का आरोप लगाया है। 16 मार्च को सांसद द्वारा लिखे गए इस पत्र के सार्वजनिक होते ही भाजपा में हड़कंप मच गया है। सांसद खरवार ने मांग की है कि उन पर हमला करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

सीएम ने भड़ककर तत्काल बाहर निकला

सांसद छोटेलाल खरवार ने पत्र में कहा है कि प्रदेश में जब सपा की सरकार थी, तब उन्होंने चंदौली के नौगढ़ ब्लाक से अपने भाई जवाहर खरवार को ब्लाक प्रमुख बनवाया था लेकिन, जैसे ही भाजपा सरकार आई तो पार्टी के ही कुछ नेताओं द्वारा सपा व बसपा के लोगों के साथ मिलकर मेरे भाई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इन सबके पीछे मेरा दोष बस इतना था कि सामान्य सीट पर दलित को मैंने ब्लाक प्रमुख बनवाया था। इसके अलावा उन लोगों द्वारा मुझे जान से मारने तक की धमकी भी दी गई। इसके विरोध में मैं तीन बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेंद्र नाथ पांडेय व दो बार प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल तथा जिले की प्रभारी मंत्री से भी मुलाकात की। बावजूद इसके सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उनसे मामले के बारे में अवगत कराया तो वह मुझ पर भड़क गए और तत्काल बाहर निकल जाने को कहा। 

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पीएम को पत्र भेजने की बात स्वीकारी

पत्र के संबंध में जब गुरुवार को सांसद छोटेलाल खरवार से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि हां उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। सीएम द्वारा मुझे डांटकर भगा दिया गया था। प्रदेश में जब मेरी बात नहीं सुनी गई तो मैंने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई।

सरकार की ये कैसी ‘दलित-नीति’ है कि न तो वो दलितों की मूर्तियां तोड़ने से लोगों को रोक रही है न उनकी हत्याएं करने से और ऊपर से नाम व एक्ट बदलने की भी साज़िश हो रही है। ये सब क्यों हो रहा है और किसके इशारे पर, ये बड़ा सवाल है। क्या दलितों को सरकार से मोहभंग की सज़ा दी जा रही है?

इस मामले में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का ट्वीट काफी समीचीन है। उन्होंने लिखा है-सरकार की ये कैसी दलित-नीति है कि न तो वो दलितों की मूर्तियां तोड़ने से लोगों को रोक रही है और न उनकी हत्याएं करने से। ऊपर से नाम और एक्ट बदलने की भी साज़िश हो रही है। यह सब क्यों हो रहा है और किसके इशारे पर ये बड़ा सवाल है। क्या दलितों को सरकार से मोहभंग की सज़ा दी जा रही है।

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