जेएनयू विवाद मामले में हाई कोर्ट से उमर खालिद को मिली तात्कालिक राहत
नई दिल्ली। दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में 9 फरवरी 2009 को कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद को तात्कालिक राहत प्रदान की है। बुधवार को हाई कोर्ट ने इसी मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को भी तात्कालिक राहत प्रदान की थी। हाई कोर्ट ने जेएनयू प्रशासन समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए फिलहाल दोनों के खिलाफ कार्रवाई से रोक लगा दी है।
उमर खालिद ने बृहस्पतिवार को हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर द्वारा 4 जुलाई को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी थी। मामले में हाई कोर्ट ने शुक्रवार तक जेएनयू प्रशासन से जवाब भी मांगा है। हाई कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद मामले में जेएनयू द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने उमर खालिद का निष्कासन रोक दिया है। साथ ही जांच समिति ने मामले में उमर खालिद पर लगाए गए 10 हजार रुपये के जुर्माने पर भी रोक लगा दी है।
18 जुलाई थी जुर्माना भरने की अंतिम तिथि
बुधवार को हाई कोर्ट ने इसी मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा था कि उन्होंने मामले को पढ़ा नहीं है। 20 जुलाई को इस मामले को नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। इस पर कन्हैया कुमार की वकील तरन्नुम चीमा ने कहा था कि क्योंकि कन्हैया जेएनयू के छात्र हैं और 18 जुलाई तक जुर्माना भरने की अंतिम तारीख है। ऐसे में तत्काल सुनवाई की जरूरत है। इस पर पीठ ने 20 जुलाई तक मामले में कार्रवाई करने पर रोक लगा दी।
बता दें कि जेएनयू की उच्चस्तरीय जांच समिति ने पांच जुलाई को रिपोर्ट में पूर्व समिति के फैसले को बरकरार रखा था। समिति ने अफजल गुरु की फांसी के विरोध में 9 फरवरी 2016 को परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कथित तौर पर देशविरोधी नारेबाजी करने के मामले में कन्हैया पर 10,000 का जुर्माना लगाया था। मामले में छात्र उमर खालिद का जेएनयू से निष्कासन करने समेत 13 अन्य छात्रों पर भी जुर्माना लगाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई थी। जेएनयू प्रशासन के फैसले के खिलाफ मंगलवार को कन्हैया कुमार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।





