भारत के इस शहर मे मिले तेल भण्डार, जमीन से 500 फीट नीचे दबा पड़ा है लाखों लीटर तेल

आपको ये जानकर बड़ी खुशी होगी कि वैज्ञानिकों ने भारत में तेल का भंडार खोज लिया है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग के पांच जिलों में एक हजार किमी से ज्यादा के दायरे में क्रूड ऑयल एवं प्राकृतिक गैस के भंडार होने के संकेत मिले हैं। सरकार द्वारा देशभर में प्राकृतिक संसाधनों की खोज कराई जा रही है।

भारत के इस शहर मे मिले तेल भण्डार, जमीन से 500 फीट नीचे दबा पड़ा है लाखों लीटर तेल

प्राकृतिक संसाधनों का सर्वे कर रही अल्फा जियो इंडिया द्वारा लिए गए सैंपलों से जमीन के भीतर तेल एवं गैस के भंडार होने का पता चला है। भारत सरकार क्रू ड ऑयल व प्राकृतिक गैस का पता लगाने के लिए सेटेलाइट सर्वे शुरू कर कराया गया था। सर्वे कर रही एजेंसी अल्फा इंडिया अभी शिवपुरी,सागर-बीना श्योपुर में सर्वे कर जमीन के भीतर प्राकृतिक संसाधन होने का पता लगा चुकी है।

वज्ञैनिकों द्वारा बताया गया है कि जमीन के भीतर 100 से 500 फीट गहराई तक सागर के बीना से लेकर अशोक नगर,शिवपुरी,श्योपुर होकर राजस्थान के बीकानेर तक क्रू ड ऑयल की परत होने की संभावना है। केन्द्र और राज्य शासन की दिलचस्पी के बाद कंपनी ने मप्र में इस कार्य को करने के लिए अल्फा जीईओ इण्डिया लिमिटेड हैदराबाद को जिम्मा सौंप दिया। जिसके द्वारा बुधवार से श्योपुर के बड़ौदा क्षेत्र में कार्य भी शुरू कर दिया है।

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कंपनी के द्वारा शॉटगन से 30 मीटर गहरे गड्ढे करके इसकी तलाश की जा रही है। साथ ही इन गड्ढों को भी मशीन से डाटा कलेक्ट करने के बाद बंद किया जा रहा है। यहां पर कार्य कर रहे तकनीकी दल के सदस्यों ने बताया कि एक लाइन विशेष में हाइड्रो कार्बन की खोज की जा रही है।

श्योपुर में यह कार्य करीब दो दिन और चलेगा। आपको बता दें कि साल 2006 में बड़ौदा के ऊंडाखाड के पुल के नजदीक एक खेत के बोर से अचानक 50 फीट ऊंची पानी की धार,गैस के साथ निकलना शुरू हो गई थी। जिसको एक माह बाद जिला प्रशासन के बुलावे पर ओएनजीसी की टीम ने आकर बंद किया और तब टीम ने गैस का परीक्षण करके यह बताया कि गैस मीथेन है। हालांकि तब भी यहां पर गैस का भंडार होने और उसकी तलाश किए जाने की मांग क्षेत्र के लोगों के द्वारा उठाई गई। जिससे जिले में रिफाइनरी शुरू हो सके।

उस समय बताया जाता है कि तत्समय जांच को आए एक्सपर्टस ने बोर के अंदर से निकल रही गैस को बंद करने से पूर्व उसका परीक्षण भी किया और यह पाया था कि गैस तो है। पर उतनी मात्रा में उपलब्ध नहीं है, जिससे रिफाइनरी लगाकर उसका दोहन किया जा सके और मामला शने-शने कर ठंडा पड़ गया। इसके साथ बड़ौदा सहित जिलेवासियों की तैल और गैस होने की संभावनाओं को लेकर परवान चढ़ी उम्मीद भी काफूर हो गई। अब एक बार फिर इसकी तलाश यहां पर सरकार द्वारा कराए जाने की जानकारी से लोगों के चेहरे खिल गए हैं। जिसके चलते यह कार्रवाई अब फिर से शुरू हो गई है।

कंपनी के द्वारा हाइड्रो कार्बन की तलाश जिन जिलों में करने की स्वीकृति दी गई है। उनमें ओवेदुल्लागंज, रायसेन, सीहोर, विदिशा, भोपाल, देवास, अशोकनगर, धार, गुना, रामगढ, शिवपुरी, उज्जैन, अली राजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, नीमच और श्योपुर शामिल है।श्योपुर के साथ ही बडवार, इंदौर, शाजापुर, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, पश्चिम छिंदबाड़ा, पूर्व छिंदवाडा, दक्षिण सागर, उत्तर सागर, दमोह और उत्तर बैतूल शामिल हैं।

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