जालंधर/गुरदासपुर/पठानकोट. आखिरकार भाजपा से स्वर्ण सलारिया को लाेकसभा उपचुनाव के लिए टिकट मिल गई। कई दिनों से सलारिया और विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना के बीच टिकट को लेकर चल रही रस्साकसी वीरवार को खत्म हो गई। ऐसा पहली बार होगा जब इस क्षेत्र से किसी मुख्य पार्टी से कोई सिख चेहरा नहीं होगा। सलारिया का कांग्रेस के सुनील जाखड़ और आप के सुरेश खजूरिया से मुकाबला होगा।
इस सीट पर 16 बार हो चुके लोकसभा चुनाव में किसी किसी पार्टी ने सिख चेहरा जरूर उतारा। यहां से 7 बार सिख तो 9 बार हिंदू कैंडिडेट जीतता रहा है। हलके में 43% सिख वोटर्स और 46.3% हिंदू वोटर्स हैं। इस क्षेत्र में 3 लाख राजपूत वोटों को देखते हुए सलारिया को उतारा गया है। हालांकि, सलारिया का सारा कारोबार मुंबई में है। 2014 में टिकट मिलने पर सलारिया ने आजाद तौर पर उतरने की धमकी भी दी थी लेकिन बाद में मान गए थे।
विनोद खन्ना के समान उन पर भी बाहरी प्रत्याशी का ठप्पा लगना
– विनोद खन्ना की पहली पत्नी गीतांजलि का पंजाब से होने के साथ सिख समुदाय से ताल्लुक होना और कविता के टिकट के बाद गीतांजलि के उनके सामने आने की संभावना
– भाजपा की प्रदेश इकाई का लोकल प्रत्याशी पर जोर देना
– पंजाब की ना होने के साथ ही पंजाबी बोली भी नहीं आना कारण
– 15.5 लाख वोटर वाली लोकसभा सीट में 3 लाख वोटर राजपूत हैं।
– सलारिया का लोकल होना और उनकी मां बहन समेत परिवार का हलके के चौहाना गांव में रहना।
– दिल्ली से पंजाब तक 98 बीजेपी नेताओं में से 93 ने समर्थन किया।
– 2014 में संसदीय बोर्ड के कई सदस्यों ने टिकट का वादा किया था।
– आर्थिक रूप से मजबूत और रामदेव सहित कई दिग्गज नेताओं का साथ।