MCD उपचुनावः सभी वार्डों के नतीजों की घोषणा,5 आप की बड़ी जीत,4 कांग्रेस, 3 सीटें जीती भाजपा

नई दिल्ली। दिल्ली में MCD की 13 सीटों के लिए उपचुनाव के लिए मतगणना अंतिम चरण में है। रुझानों व चुनाव परिणाम में आप और कांग्रेस को फायद मिलता दिखाई दे रहा है। वहीं, भाजपा को मायूसी मिल रही है।आज दोपहर तक सारेे परिणाम आ जाएंगे।
- शालीमार बाग सीट : भाजपा के उम्मीदवार बीएम भंडारी ने 1451 मतों से जीत हासिल की है।
- मटियाला सीट : आप उम्मीदवार रमेश जीते।
- कमरुद्दीन सीटः पर कांग्रेस को सफलता मिली है। यहां पर अशोक भरद्वाज ने जीत हासिल की है।
- झिलमिल वार्ड : कांग्रेस उम्मीदवार पंकज लूथरा ने 2419 मतों के अंतर से जीत हासिल की है।
- नवादा : भाजपा के कृष्ण गहलोत जीत गए हैं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार को 4843 मतों से हराया है।
- बल्लीमारान सीट से आप उम्मीदवार सादिक ने निर्दलीय प्रत्याशी मोहम्मद कज़्ज़फ़ी को 1938 वोट से हराया।
- खिचड़ीपुर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार आनंद कुमार ने जीत हासिल की है।
- वजीरपुर वार्ड 67 से भाजपा के महेंद्र नागपाल जीत गए हैं। महेंद्र नागपाल ने आप के सचिन सिंघल को 3608 वोट से हराया।
- विकास नगर से आप प्रत्याशी अशोक कुमार ने निर्दलीय प्रत्याशी सुनील जिंदल को 1120 वोट से हराया।
- भाटी वार्ड से निर्दलीय उम्मीदवार एडवोकेट राजेंद्र तंवर ने जीत हासिल की है।
- तेहखंड में आप के उम्मीदवार अभिषेक विधूड़ी ने जीत हासिल की है।
- मुनीरका सीट पर कांग्रेस की उम्मीदवार योगिता राठी ने आप की उम्मीदवार सुनीता टोकस को 770 वोट से हराया है।
- नानकपुरा सीट पर अाप उम्मीदवार अनिल ने जीत हासिल की।
- एमसीडी चुनाव में मिली जीत के बाद जश्न मनाने का दौर भी शुरू हो गया है।
पूर्वी दिल्ली की दोनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा नहीं था। लंबे समय से झिलमिल सीट भाजपा के कब्जे में थी। झिलमिल सीट पर जीत से कांग्रेस के पूर्व मंत्री नरेंद्र नाथ का कद बढेगा। प्रत्याशी चयन से लेकर प्रचार तक में अगुवा वही थे।
झिलमिल सीट से कांग्रेस के लिए जीत हासिल करने वाले पंकज लूथरा पहली बार चुनाव लड़े। जब उन्हें टिकट मिला थी, तब किसी को भरोसा नहीं था कि वो जीत भी सकते हैं।
यहां पर याद दिला दें कि दिल्ली के तीनों निगमों में भाजपा का एक दशक से कब्जा है। ऐसे में भाजपा अगर इस चुनाव में अच्छा नहीं भी करेगी, तो उसे लंबे समय तक शासन की नकारात्मकता से बचाव का लाभ मिल जाएगा, लेकिन केजरीवाल के सामने ऐसा नहीं होगा। इस चुनाव में केजरीवाल सरकार का बहुत कुछ दांव पर है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2013 से ही नौ वार्डो में कोई प्रतिनिधि नहीं है, जबकि बाकी सीटें फरवरी 2015 से ही खाली थीं।
भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों ही अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन सच तो यह है कि 67 सीटों के प्रचंड बहुमत के बाद आम आदमी पार्टी के लिए उपचुनाव बड़ी चुनौती है। वहीं, कांग्रेस के लिए यह चुनाव कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई है।
नगर निगम की 13 सीटों पर उपचुनाव भले ही देखने में छोटा लग रहा है, लेकिन जिस तरह से ये मुकाबला हो रहा है, वो खासा दिलचस्प है।
कुल 13 वार्डों में 94 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं, इनमें सबसे ज्यादा उम्मीदवार कमरूद्दीन नगर वार्ड से 12 और सबसे कम मटियाला और मुनीरका से चार-चार उम्मीदवार हैं।





