कांग्रेस की प्रतिष्ठा का स्थानीय निकाय चुनाव, जिताऊ प्रत्याशियों पर खेलेगी दांव

नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस जिताऊ और दमदार प्रत्याशियों पर दांव खेलेगी। विधायकों, पूर्व विधायकों व विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के साथ ही नए चुने गए जिलाध्यक्षों-महानगर अध्यक्षों से बाकायदा राय-मशविरे के बाद 84 नगर निकायों में से अधिकतर में प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है। कांग्रेस की प्रतिष्ठा का स्थानीय निकाय चुनाव, जिताऊ प्रत्याशियों पर खेलेगी दांव

साथ ही जिन सीटों पर अधिक दावेदार होने से विवाद है, वहां दावेदारों को ही आम सहमति बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। चुनाव में दमदार प्रदर्शन का ही दबाव है कि कांग्रेस हाईकमान ने भी किसी तरह की सिफारिश से हाथ पीछे खींच लिए हैं। संकेत साफ हैं कि चुनाव मिलजुलकर लड़ा जाए। प्रदर्शन कमजोर रहने की सूरत में सामूहिक जिम्मेदारी से बचना विधायकों, दिग्गज नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ताओं के लिए मुमकिन नहीं होगा। 

निकाय चुनाव में कांग्रेस का पूरा जोर भाजपा की मजबूत घेराबंदी पर है। इसके लिए पार्टी ने भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर मोर्चाबंदी की है। प्रत्याशियों के चयन में इस बाद विधायकों, पूर्व विधायकों, विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों और दिग्गज नेताओं से भी राय ली गई है। 

विधायकों और पूर्व विधायकों को यह मौका भी दिया गया है कि आगामी लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर शहरों में बनने वाली सरकारों के प्रतिनिधियों का चयन किया जाए, ताकि आने वाली चुनौतियों में उनका भरपूर उपयोग किया जा सके। 

नए जिलाध्यक्षों से भी मशविरा जिताऊ प्रत्याशियों के चयन में कसर न रहे, इसे ध्यान में रखकर पार्टी ने नए जिलाध्यक्षों के सुझाव को भी तरजीह दी है। दरअसल, निकाय चुनाव के लिए बनाए गए पर्यवेक्षकों ने प्रत्याशियों के नामों का जो पैनल तैयार किया है, वह चार महीने पुराना है। 

निकाय चुनाव में देरी के चलते जमीनी स्तर के साथ ही पार्टी के जिला व ब्लॉक अध्यक्षों में बदलाव हो चुका है। निकाय चुनाव में प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए पार्टी ने प्रत्याशियों के चयन में निचले स्तर से लेकर ऊपरी स्तर तक संगठन और क्षेत्रीय स्तर पर हैसियत रखने वाले नेताओं को तरजीह देने की रणनीति पर काम किया है। 

भाजपा की सूची पर निगाहें 

यही नहीं बाहरी मोर्चे पर कांग्रेस की नजरें भाजपा की रणनीति की काट तैयार करने पर टिकी हैं। इसके लिए विपक्षी पार्टी निकाय अध्यक्षों और मेयर पद के लिए सत्तारूढ दल के संभावित प्रत्याशियों की थाह लेने में जुटी है। भरपूर कोशिश ये की जा रही है कि भाजपा की सूची घोषित किए जाने के बाद ही कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी की जाए। 

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