इस शख्स की आपबीती सुन, अपने बच्चों को आप कभी नहीं भेजेंगे विदेश

कहा कि उसकी जान तो बच गई, लेकिन लगभग 13 लाख रुपये की एजेंट हड़प लिए। एजेंट आज भी करनाल में बिना कार्यालय चला कर शिकार ढूंढ़ रहे हैं। कहा कि अब तकरीबन तीन महीने बाद पूंडरी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। गांव काकौत के कुलदीप ने अमर उजाला को बताया कि उसने आईटीआई किया है। इसी बीच एक एजेंट पूंडरी में चाय की रेहड़ी चला रहे उसके पिता के पास आने-जाने लगा। उसने पिता को उसे विदेश भेजने का झांसा दिया और इसके लिए उसने 12 लाख 90 रुपये की राशि की मांग रखी।
एजेंट के कहने पर उसने करनाल के एक बैंक में खाता खुलवाकर उससे मिली चेक बुक एजेंट को दे दी। साथ ही 1 लाख रुपया दे दिया। उसका आरोप है कि, वर्ष 2016 में उसके कहने पर उन्होंने उस खाते में ढाई लाख रुपये की राशि जमा करा दिए। आरोप है कि, इस पर एजेंट ने इसमें से 2 लाख रुपये निकलवा लिए और कहा कि खाते में लेन-देन दिखाना जरूरी है। करीब सात-आठ माह तक वह इसी तरह उन्हें टरकाता रहा। बीच में एक बार उसे दिल्ली भी ले गया, जहां उससे सर्बिया जाने के लिए कागजातों पर हस्ताक्षर करवा लिए।
बीच में उसे अबुधाबी में उसे रुकने के लिए कहा गया। वह किसी तरह अबुधाबी एयरपोर्ट से बाहर आया तो यहां उसे छह-सात पाकिस्तानी युवक मिले। यहां वीजा संबंधी औपचारिकता पूरी करने की बात कहकर उसे एक जगह ले गए। जहां उसे करीब ढाई माह तक एक फार्म पर रखकर जान से मारने की धमकी देकर काम करवाया। इसी बीच उनके परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। लेकिन पुलिस ने यहां कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद यही युवक उसे सर्बिया के बॉर्डर से जंगलों से होते हुए ग्रीस ले गए।
जंगल में वे कई दिनों तक भूखे रहे। ग्रीस में पाकिस्तानियों ने उनके घर पर फोन करवाकर उनके खाते में 2 लाख रुपये जमा करवाने को कहा। कई दिनों तक उनकी चंगुल में रहने के बाद वह किसी तरह उनके कब्जे से भाग निकला और वहां एक भारतीय पंजाब से एमपी सिंह नामक सरदार से विनती की कि उसके कागजात कुछ युवकों ने छीन लिए हैं और वे उसका पीछा कर रहे हैं। इसके बाद सरदार ने 300 यूरो से ज्यादा खर्चकर भारतीय दूतावास से संपर्क करवाया और वह किसी तरह सितंबर माह में स्वदेश लौट पाया।





