आइए जानते हैं कि साल का पहला चंद्र ग्रहण महाराष्ट्र में दिखेगा की नहीं..

मई को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। आइए जानते हैं चंद्र ग्रहण का समय सूतक काल कहां-कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण और हर बार पूर्णिमा पर ही क्यों लगता है चंद्र ग्रहण।

साल का पहला चंद्र ग्रहण शुक्रवार, 5 मई को लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण रात 08 बजकर 44 मिनट से शुरु होगा और इसका समापन देर रात 1 बजकर 02 मिनट पर होगा। चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 15 मिनट की होगी।
बता दें कि यह एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा, जो तुला राशि और स्वाति नक्षत्र में लगेगा। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 130 साल बाद बुद्ध पूर्णिमा के महासंयोग में लग रहा है। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण भी हमारे जीवन पर कई तरह के सकारात्मक और नकारात्मक बड़ा प्रभाव डालता है।
आइए जानते हैं कि साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण कहां- कहां दिखाई देगा, इसका समय क्या होगा, चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल लगेगा या नहीं?
कैसे लगता है च्रंद ग्रहण?
जैसा कि हम सभी ये बात जानते हैं कि पृथ्वी परिक्रमण और परिभ्रमण करती है। परिक्रमण यानी पृथ्वी का सूर्य की परिक्रमा करना और परिभ्रमण यानी अपनी ही धुरी पर घूमना। सूर्य की परिक्रमा के दौरान जब पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में आ जाती है तब चंद्रग्रहण लगता है।
कब लगता है चंद्रग्रहण?
पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इससे चंद्रमा का छाया वाला भाग अंधकारमय हो जाता है और इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है। इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
क्या है आज के चंद्र ग्रहण का समय?
साल का पहला चंद्र ग्रहण शुक्रवार, 5 मई को लगेगा। चंद्र ग्रहण रात 08 बजकर 44 मिनट से शुरु होकेर देर रात 1 बजकर 02 मिनट पर खत्म होगा। चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 15 मिनट की है।
किन-किन जगहों पर दिखेगा चंद्र ग्रहण?
साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण यूरोप, एशिया के अधिकांश हिस्से, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, प्रशांत, अटलांटिक, अंटार्कटिका और हिंद महासागर में भी दिखाई देगा। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा।
लगेगा सूतक काल?
ज्योतिषविदों का कहना है कि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवी-देवताओं की पूजा करने पर रोक लगा दी जाती है। हालांकि 5 मई को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं होगा, इसलिए भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। आप बिना किसी संकोच के पूजा-पाठ कर सकते हैं। साथ ही, भोजन, विश्राम या दैनिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगेगा। गर्भवती महिलाओं को भी किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
उपच्छाया चंद्र ग्रहण क्या होता है?
5 मई को लगने वाला चंद्र ग्रहण वास्तव में एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। हर चंद्र ग्रहण शुरू होने से पहले चंद्रमा धरती की उपच्छाया में प्रवेश करता है, जिसे चंद्र मालिन्य (Penumbra) कहा जाता है।
अक्सर चंद्रमा धरती की उपच्छाया में प्रवेश कर वहीं से बाहर निकल जाता है और उसका स्वरूप धुंधला सा दिखाई देने लगता है। इसे उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहा जाता है। उपच्छाया चंद्र ग्रहण को धार्मिक महत्व नहीं दिया गया है, इसलिए इसमें सूतक काल भी मान्य नहीं होता है।
कैसे देख सकते हैं चंद्रग्रहण?
चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण के मुकeबले ज्यादा व्यापक स्तर पर दिखाई देता है और इसे पृथ्वी पर रात में कहीं भी देखा जा सकता है। सूर्य ग्रहण को देखने के लिए खास उपकरणों की ज़रूरत होती है लेकिन चंद्र ग्रहण के साथ ऐसा नहीं होता है। आप नग्न आंखों से भी चांद को देख सकते हैं।
इसे देखने के लिए टेलीस्कोप का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। नासा समेत कई संस्थान इस चंद्रग्रहण का लाइवस्ट्रीम और फिर रिकार्डेड वीडियो भी चलाएंगे।
बता दें कि भारत में अगला पूर्ण चंद्रग्रहण मार्च 2025 में होगा। पांच मई को होने वाला चंद्र ग्रहण पूरे भारत में दिखेगा बशर्ते आसमान साफ हो।
पूर्णिमा पर ही क्यों लगता है चंद्र ग्रहण ?
सूर्य ग्रहण ज्यादतर अमावस्या पर और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन लगता है लेकिन पूर्णिमा के दिन ही चंद्र ग्रहण क्यों लगता है, इसके बारे में बहुत कम ही लोगों को जानकारी है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जब भी चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आता है, वह पूर्णिमा का दिन ही होता है। पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगने का कारण है सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा का एक सीध में होना। यह सिर्फ ज्यामितीय प्रतिबन्ध के कारण ही हो सकता है।





