जानिए चंद्रमा की मिट्टी में बोए पौधों का हुआ क्या?

अमेरिका, चीन समेत दुनिया के कई देश चांद पर बस्तियां बसाने का सपना देख रहे हैं. वहां खेती करना चाहते हैं. यहां तक कि वहां की जमीन की खरीद फरोख्त भी शुरू हो गई है. चीन ने तो अंतरिक्ष में खेती करने के प्रयास भी किए. कुछ बीज भी उगाए. उधर, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के शोध दल ने भी चांद की मिट्टी में कुछ पौधे रोपे थे. मगर उनका हुआ क्या? ऑनलाइन प्लेटफार्म कोरा पर यही सवाल पूछा गया. आइए जानते हैं इस इंट्रेस्टिंग फैक्ट का जवाब.
नासा के अपोलो मिशन के दौरान एस्ट्रोनॉट चांद की सतह से 382 किलोग्राम मिट्टी लाए थे. इसमें चांद की चट्टानें, कोर नमूने, कंकड़, रेत और धूल शामिल थे. फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को एक पौधा लगाने के लिए सिर्फ 1 ग्राम मिट्टी दी गई. शोधकर्ताओं ने इस मिट्टी में कुछ पौधे बोए और जानने की कोशिश की कि क्या इस मिट्टी में खेती की जा सकती है. शोधकर्ता यह देखकर हैरान रह गए कि बोने के 2 दिन बाद ही बीज अंकुरित हो गए. आमतौर पर इसमें 4-5 दिन का समय लगता है.
बता नहीं सकता कि हम कितने हैरान थे
यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अन्ना-लिसा पॉल ने इस पर रिसर्च पेपर पब्लिश किया है. लिखा, मैं आपको बता नहीं सकता कि हम कितने हैरान थे. 6 दिन तक सभी पौधे एक जैसे नजर आ रहे थे. मगर अचानक बहुत कुछ बदल गया. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर अन्ना-लिसा पॉल ने कहा-6 दिनों बाद चांद की मिट्टी में उगाए गए पौधे कमजोर होने लगे. इनका विकास थमने लगा. एक वक्त ऐसा भी आया कि सारे पौधे खत्म हो गए. इससे तय हो गया कि भविष्य में अगर इंसान को वहां रहना है तो किस तरह के फूड की आवश्यकता होगी. वहां खेती कैसे की जाएगी.





