कश्मीरी पंडितों का दर्द, दो लाख कर्ज लेकर दुकान में डाला था सामान…

मुट्ठी में जेडीए की ओर से ध्वस्त की गईं दुकानों से विस्थापित कश्मीरी पंडित आहत हैं। वीरवार को दुकानदार मलबे से इस उम्मीद में सामान ढूंढते दिखे, ताकि नुकसान की कुछ भरपाई हो सके। नम आंखों से पीड़ित 80 वर्षीय दुकानदार नाना जी ने बताया कि 22 साल पहले परिवार का गुजारा चलाने के लिए सड़क किनारे थड़ा बनाया था। उसमें किराने का सामान रखा था। फिर बैंक से दो लाख रुपये का कर्ज लेकर सामान बढ़ाया लेकिन, यह पता नहीं था कि एक दिन जेडीए सबकुछ तहस-नहस कर देगा।

उन्होंने बताया कि बैंक कर्ज चुकाने के लिए हर महीने 3200 रुपये किस्त कटती हैं। दुकान चलती थी तो किस्त दे पाता था, लेकिन अब कैसे दे पाऊंगा यह पता नहीं। परिवार में तीन बेटियां हैं। 9750 रुपये राहत राशि मिलती हैं। इससे घर का गुजारा चलाऊं या बैंक की किस्तें दूं।कश्मीरी पंडित और परेशानियों का दमन चोली का साथ है। उमर सरकार बनने के बाद यह कश्मीरी विस्थापितों को पहला तोहफा है। सरकार रोजगार देने की बजाय उसे छीन रही है। मेडिकल शॉप चलाने वाले सुमित ने बताया कि जेएडीए ने सामान समेटने का समय ही नहीं दिया। काफी सामान दबा गया। एक अन्य दुकानदार जवाहर लाल ने कार्रवाई को गुंडागर्दी बताया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया।

शिविर अध्यक्ष ने की कार्रवाई की आलोचना
मुट्ठी प्रवासी शिविर के अध्यक्ष अनिल भान ने इस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जेडीए को एक माह का इंतजार करना चाहिए था, क्योंकि राहत पुनर्विकास विभाग विस्थापित शिविर के भीतर दुकानें बना रहा है। इस कार्रवाई को टाला जा सकता था। 

जेडीए बनाएगा 208 नए फ्लैट
मुट्ठी विस्थापित कॉलोनी के सामने जेडीए अपनी भूमि पर फ्लैट बनाएगा। यहां पर करीब 208 फ्लैट का निर्माण प्रस्तावित है। इसको लेकर ही जेडीए जमीन को खाली करवा रहा है।

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