Javed Akhtar को सेट पर करना पड़ता था ये काम! बोले- असिस्टेंट डायरेक्टर को नहीं मिलती इज्जत

80 साल के जावेद अख्तर ने सिनेमा में दशकों बिताए हैं। कभी गीतकार की भूमिका निभाई तो कभी बतौर लेखक बेहतरीन फिल्मी कहानियों को पेश किया। हालांकि, कम लोग जानते हैं कि वह कभी असिस्टेंट डायरेक्टर भी रह चुके हैं।
हाल ही में, जावेद अख्तर ग्लैमर वर्ल्ड के पीछे की असलियत बताई है। उन्होंने बताया कि एक दौर में असिस्टेंट डायरेक्टर के साथ कैसा सलूक किया जाता था।
जावेद अख्तर ने खोले इंडस्ट्री से जुड़े राज
दरअसल, जावेद अख्तर ने गुरुवार को 19वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में शामिल हुए। उन्होंने धर्मनिर्पेक्षता समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। जावेद ने आगे बदलते वक्त के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि वक्त बदलता है जो अपने साथ अच्छा और बुरा दोनों ही अनुभव लेकर आता है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा उदाहरण दिया।
असिस्टेंट डायरेक्टर को सेट पर नहीं मिलता था सम्मान
जावेद अक्तर ने उस वक्त का एक किस्सा शेयर किया है, जब असिस्टेंट डायरेक्टर को ज्यादा सम्मान या तवज्जो नहीं मिलती थी। उन्होंने कहा, “आज फिल्म इंडस्ट्री में चीजें पहले से कहीं ज्यादा व्यवस्थित हैं। मुझे याद है जब मैं असिस्टेंट डायरेक्टर था, तो इस पद की बिल्कुल इज्जत नहीं थी। हमारा काम क्या था? ‘मैडम के जूते जल्दी लाओ।’ ‘हीरो का कोट कहां है?’ यही हमारी जिंदगी थी। आज के असिस्टेंट स्टार्स को उनके नाम से बुलाते हैं। जब मैं उन्हें देखता हूं तो डर जाता हूं। असिस्टेंट डायरेक्टर हीरो को उनके नाम से बुला रहे हैं- हम इसकी कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे।”
जावेद अख्तर की बेस्ट मूवीज
जावेद अख्तर को अपनी लेखनी के लिए पहचान मिली। सलीम खान के साथ मिलकर जावेद अक्तर ने एक से बढ़कर एक फिल्मों की कहानी लिखी जिसमें ब्लॉकबस्टर फिल्में अंदाज, यादों की बारात, हाथी मेरे साथी, जंजीर, दीवार, शोले, क्रांति और मिस्टर इंडिया जैसी फिल्मों का नाम शामिल है।





