IS मॉड्यूल: इस तरह ‘अबु हुफैजा’ भारतीय युवाओं को ऑनलाइन बनाता था शिकार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को जिस आईएस मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है उसे ‘अबु हुफैजा’ अल बकिस्तानी ऑनलाइन नियंत्रित किया करता था। वह लगभग दो दर्जन भारतीय युवाओं को विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित कर रहा था। सूत्रों के अनुसार यह मॉडल दक्षिण-पूर्व एशिया के युवाओं को आईएस में शामिल करने के लिए बरगलाता करता था।IS मॉड्यूल: इस तरह 'अबु हुफैजा' भारतीय युवाओं को ऑनलाइन बनाता था शिकार

‘अबु हुफैजा’ का हैंडल विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच और ऑपरेशन में सामने आया है। जिसमें तेलंगाना की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट भी शामिल है जिसने बुधवार के ऑपरेशन के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मुहैया करवाई थी। इस बात की कई सूत्रों ने पुष्टि की है। एक अधिकारी ने कहा, ‘यह हैंडल असमान्य रूप से पिछले साल तब सक्रिय हुआ जब ऑनलाइन आईडी यूसुफ अल हिंदी अचानक गायब हो गई। इंडियन मुजाहिद्दीन से बगावत करके आईएस के खोरासन मॉड्यूल में शामिल होने वाला शफी अरमार इस हैंडल को संचालित और भारतीय युवाओं को इसमें शामिल करने का काम करता था।’ 

अरमार जोकि कर्नाटक के भटकल से था, माना जाता है कि पिछले साल सीरिया में उसकी मौत हो गई है। अनुमान है कि उसने 1000 युवाओं को प्रेरित किया है, जिसमें ज्यादातर दक्षिण एशिया से हैं। वह युवाओं को सीरिया आकर लड़ने के लिए कहता था। उसका भाई सुल्तान अरमार 2016 में हुई ड्रोन स्ट्राइक में मारा गया था। एक बार अल हिंदी का हैंडल गायब हुआ, युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ आकर्षित करने की कई कोशिशे की गईं।

हालांकि असल परेशानी तब शुरू हुई जब ‘अबु हुफैजा’ का हैंडल विभिन्न प्लेटफॉर्म पर दिखने लगा और सफलतापूर्वक युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा था। भारतीय जांच एजेंसी ने अक्तूबर में हुफैजा के हैंडल को ट्रैक करना शुरू किया। जिसे कि कई प्रॉक्सी सर्वर के जरिए संचालित किया जा रहा था। सूत्रों ने बताया कि लगभग एक दर्जन उत्तर भारतीय एजेंसी के रडार पर थे क्योंकि वह इस हैंडल से जुड़े हुए थे और जिहादी प्रोपेगैंडा का हिस्सा बन गए थे। यह हैंडल ज्यादातर आपराधिक छवि वाले लोगों की तलाश में रहता था और उन्हें मॉड्यूल में महत्वपूर्ण पद देता था। 

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