International women’s day : भारतीय महिलाओं ने अपने दम पर इन मुद्दों पर जीती जंग और बदल दी अपनी दुनिया…

महिलाओं के लिए बीता हुआ साल सामाजिक, राजनीतिक व सरकारी तौर पर बड़ा साल रहा। साल 2018 में कई ऐसे मुद्दे थे जिनमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और हर क्षेत्र में आगे निकलीं। 2018 महिलाओं के द्वारा अपने अधिकारों के लिए लड़ते, आरोपों का सामना करते समाज और सिस्टम के सामने कुछ जरूरी सवाल उठाते हुए गुजर गया। आइए आपको बताते हैं साल 2018 में वो कौन से बड़े मुद्दे थे जो महिलाओं से जुड़े रहे।
मी टू कैंपेन
साल 2018 में इस कैंपेन की शुरुआत हुई। इस कैंपन में महिलाओं ने सोशल मीडिया के जरिए अपने साथ फिल्म इंडस्ट्री में हुए शोषण को जाहिर किया। इस कैंपेन में केवल फिल्मी ही नहीं बल्कि राजनीतिक दुनिया व हर क्षेत्र से महिलाएं आगे आईं और अपने साथ हुए यौन शोषण को जाहिर किया। इस कैंपने के तहत कई बड़ी छवि वाले लोगों के चेहरे बेनकाब हो गए। इस कैंपेन के दौरान केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पूरा समाज दो भागों में बंटता हुआ नजर आया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा पदक
साल 2018 में 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया गया था। इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिलाओं ने सबसे ज्यादा पदक जीते। ऑस्ट्रेलिया के गोल्डकोस्ट में भारत को कुल 66 पदक मिले थे। जिसमें सबसे अधिक महिलाओं ने जीता था। इससे न सिर्फ पूरे देश ने उनकी क्षमता का लोहा माना बल्कि और अधिक संख्या में लड़कियों के खेल की दुनिया में आने का रास्ता भी तैयार हुआ।
सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात
सेना में लड़कियों की भर्ती को प्रोत्साहित करने के लिहाज से यह साल काफी महत्वपूर्ण रहा। जिन सैनिक स्कूलों में अभी तक लड़कों को ही प्रवेश की अनुमति थी, वहां लड़कियों को भी प्रवेश मिलने की शुरुआत हुई। देश में सबसे पहले लखनऊ स्थित सैनिक स्कूल ने 9वीं कक्षा में लड़कियों को प्रवेश की अनुमति दी। उसके बाद भारत के राज्य रक्षामंत्री डॉक्टर सुभाष भामरे ने देश के सभी 28 सैनिक स्कूलों और सात मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों को प्रवेश देने की व्यवस्था करने के आदेश दिए।
12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने पर मौत की सजा
बच्चियों और लड़कियों के साथ दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पॉक्सो कानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने पर मौत की सजा दी जाएगी। इस मुद्दे ने बड़े स्तर पर देश के लोगों का ध्यान भी खींचा। इस पर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय थी।
28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दे दी। यह फैसला आते ही इस मुद्दे ने एक आंदोलन की शक्ल ले ली। पूरे देशभर में व्यापक रूप से आंदोलन चला जिसमें महिलाएं भी शामिल थीं। इस आंदोलन में महिलाएं भी दो तरह से बंटी हुई थीं। कुछ महिलाओं का मानना था कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करना चाहिए। वहीं कुछ को मानना रहा कि मंदिर प्रवेश पर जो पुरानी परंपरा चली आ रही है उसी का पालन किया जाना चाहिए।





