यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने के बजाय इस काम में व्यस्त रहते हैं ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी, जाम लगने से वाहन चालकों को हुई परेशानी….

दिल्ली में यातायात की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हालत यह है कि रेल भवन चौराहे पर यातायात पुलिस खुद यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने के बजाय वहां तैनात नए संसद भवन का निर्माण करने वाली कंपनी टाटा प्रोजेक्ट्स के निजी सुरक्षा गार्डो पर सौंप रखी है। गार्डो से यातायात संचालन ठीक से नहीं हो पाने के कारण चौराहे पर जाम लगने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अधिकारियों की मानें तो संवेदनशील इलाका होने के कारण रेल भवन चौराहे पर हमेशा 8-10 यातायात कर्मियों की तैनाती रहती है। वे यातायात व्यवस्था संभालने के बजाय चौराहे से दूर हटकर समूहों में खड़े होकर वाहन चालकों के चालान काटने में व्यस्त रहते हैं। वे पीक आवर में भी यातायात व्यवस्था का संचालन नहीं करना चाहते हैं। दिल्ली में इस तरह की हालत जब वीवीआइपी इलाके की है तो अन्य इलाकों में क्या होगी, इसकी कल्पना ही की जा सकती है।
राजधानी के सभी इलाकों में सड़कों पर ड्यूटी करने वाले यातायात कर्मियों का फोकस चालान काटने पर रहता है, बेहतर यातायात प्रबंधन करने पर नहीं। यही वजह है कि दिल्ली के अधिकतर मुख्य चौराहों के अलावा सड़कों पर जहां भी निर्माण कार्य हो रहा है, लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। अधिवक्ता राजीव सिंह का कहना है कि रेल भवन चौराहे पर निजी सुरक्षा गार्डो से यातायात संचालन कराने की शिकायत वह यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार कर चुके हैं, लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा रहा है।
एएसआई नाहर सिंह और उनकी टीम रेल भवन चौक पर यातायात के प्रबंधन के लिए सुरक्षा गार्डो का इस्तेमाल कर रही है। गार्डो को यातायात प्रबंधन की ट्रेनिंग नहीं होती है। इससे आए दिन वाहन चालकों व गार्डो के बीच झगड़ा होता है। इस संबंध में यातायात पुलिस के डीसीपी अजय पाल तोमर ने कहा कि चौराहे पर यातायात कर्मी कुछ निजी सुरक्षा गार्डो की सहायता लेते हैं। हालांकि यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी यातायात कर्मियों को संभालनी चाहिए। वह औचक जांच कर दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।





