अभी अभी: इराक में मारे गए भारतीयों की मौत पर सामने आया चौंकाने वाला खुलासा, सुनकर लोगों को नहीं हो रहा यकीन

इराक में मारे गए 39 भारतीयों में 38 के शव भारत पहुंच चुके है। विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह सोमवार को भारतीयों के अवशेष लेकर भारत लौटे जिसके बाद उनके परिवार अंतिम संस्कार कर रहे हैं। शवों के पहुंचने के बावजूद सभी के मन में एक ही बात आ रही है कि इन 39 भारतियों के साथ आखिर वहां क्या हुआ होगा। इन्ही सवालों के आधार पर एक अंगेजी अखबार ने 27 भारतियों में से 7 के डेथ सर्टीफिकेट देखे जिसमें खुलासा हुआ कि इनके साथ कितनी बर्बरता हुई। इनके सिर में गोलियां मारी गई।

सर्टीफिकेट के मुताबिक वे वादी अजाब  पर मारे गए थे जो नीनेवे टाउनशिप का एक औद्योगिक क्षेत्र है जो इराक में मोसुल से लगभग 110 किलोमीटर दूर स्थित है। पीड़ित परिवार के सदस्य इस विवरण की मांग कर रहे थे। हालांकि विवादित रिपोर्टों के बाद से ये जानकारी प्राप्त हुई थी। बगदाद में 28 मार्च को भारतीय दूतावास द्वारा प्रमाणपत्र जारी किए गए जिसमें दूतावास के सहायक कांसुलर अधिकारी उमेश यादव ने हस्ताक्षर किए थे। मृत भारतीयों के रिश्तेदारों के अनुसार उनकी हत्या 15 और 20 जून के बीच हुई। गुरदासपुर के एक गांव के रहने वाले हरजीत मसीह, जिन्होंने 39 भारतीयों के साथ रहने का दावा किया और बच गए, ने समान तिथियां दीं। हालांकि,विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और  विदेश राज्यमंत्री वी.के. सिंह इस बात पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं हैं।

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आतंकियों का शिकार बने ज्यादातर लोगों की उम्र 26 से 35 साल के बीच थी। सर्टीफिकेट में शामिल सभी सूचनाएं इराक के स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले फॉरेंसिक विभाग की ओर से जारी प्रमाण पत्रों पर आधारित हैं। मृतक परिवारों को केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया गया हालांकि पंजाब सरकार पहले ही राज्य के 27 लोगों के परिवारों को 5-5 लाख रुपए और नौकरी देने का ऐलान कर चुकी है।  

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