भारतीय प्रवासी ने पेश किया ‘एन्वीग्रीन’ कैरी बैग, अब नहीं होगा प्लास्टिक का इस्तेमाल

सबको पता है कि प्लास्टिक तैयार करना तो आसान है, लेकिन इसे खत्म करना बहुत ही मुश्किल। लिहाजा ये पर्यावरण के लिए बेहद घातक है। जिसका विकल्प दिया है भारतीय युवा उद्यमी अश्वथ हेगड़े ने।भारतीय प्रवासी

अस्वथ के मुताबिक पालीथिन को डीकम्पोज होने में करीब पांच सौ साल लग जाते हैं। विभिन्न सरकारों द्वारा इस पर बैन लगाने के बावजूद इसका धड़ल्ले से लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। सस्ता होने के कारण चोरी छिपे दुकानदार भी ग्राहकों को प्लास्टिक बैग में सामान लेने पर मजबूर करते हैं। प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने की बजाय इसका बेहतर और सस्ता विकल्प ज्यादा कारगर साबित हो सकता है।

‘एन्वीग्रीन’ कैरी बैग के साथ प्रवासी भारतीय उद्यमी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अस्वथ की उम्र महज 24 साल है। कारोबारी लिहाज से उनका प्रयास अगर सफल हुआ तो दुनियाभर में लोगों को पालीथिन से निजात के तौर पर बड़ी राहत मिलेगी।

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आपको जानकर हैरानी होगी की ‘एन्वीग्रीन’ सब्जियों के वेस्ट (कचरा) और सब्जियों के तेल से बनाया जाता है। सबसे पहले कर्नाटक स्टेट पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने इसे मान्यता देते हुए ‘एन्वीग्रीन’ को प्लास्टिक फ्री घोषित किया है। दक्षिण एशिया की मशहूर टेस्टिंग लैब TÜV SÜD ने भी इस बैग को पर्यावरण के लिए सुरक्षित बताया है।

अस्वथ हेगड़े बचपन से ही प्रतिभाशाली रहे। जब वे अपने गृह नगर मैंगलोर में पढ़ाई कर रहे थे उसी दौरान सन् 2012 में सिटी कारपोरेशन ने प्लास्टिक बैग को प्रतिबंधित कर दिया था। हेगड़े के दिमाग ने तभी से प्लास्टिक के विकल्प की तलाश शुरू कर दी थी। अस्वथ ने अपने व्यक्तिगत संसाधनों से युरोप के दस शोधकर्ताओं को इस बारे में रिसर्च के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कतर में ग्रीन कारपोरेशन की स्थापना की। वर्षों की मेहनत के बाद अस्वथ को बायोडिग्रेडेबल विकल्प हासिल हुआ। जिसे कर्नाटक सरकार की मान्यता भी अब मिल चुकी है।

चार साल के लंबे रिसर्च के बाद कंपनी ने साल 2016 में पहली बार कतर में ही बायोडिग्रेडेबल बैग लान्च किया। कतर में राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के दिन लान्च हुए इस पालीथिन के विकल्प को लोगों ने खूब पसंद किया।

हेगड़े का दावा है कि उनके द्वारा तैयार ‘एन्वीग्रीन’ बैग 60 से 180 दिनों में ही नष्ट हो जाता है। साथ ही इसका कोई अतिरिक्त दुष्प्रभाव भी नहीं है।

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