मां कूष्मांडा की पूजा में करें इन मंत्रों का जप

नवरात्र की पवित्र अवधि नवदर्गा की पूजा-अर्चना और कृपा प्राप्ति के लिए खास मानी गई है। नवरात्र के चौथे दिन पर मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना का विधान है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पर मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करने से साधक को आरोग्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे में आप माता कूष्मांडा की पूजा में इन मंत्रों का जप कर सकते हैं।
इस बार चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2025) की चतुर्थी और पंचमी तिथि की पूजन एक ही दिन किया जा रहा है। ऐसे में मां कूष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा एक ही दिन की जाएगी। ऐसे में यह दिन दो देवियों की कृपा प्राप्ति के लिए बहुत ही उत्तम रहने वाला है।
ऐसे में आपको नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा (Navratri Maa Kushmanda Puja) के दौरान इन मंत्रों का जप जरूर करना चाहिए, ताकि आपको व आपके परिवार को मां कूष्मांडा की कृपा प्राप्त हो सके।
मां कूष्मांडा के मंत्र –
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दु:ख शोक निवारिणाम्।
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
मां कूष्मांडा का बीच मंत्र –
या देवी सर्वभूतेषु कुष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।
माना जाता है कि कूष्मांडा देवी की पूजा से भक्तों की सभी तरह के रोग, कष्ट और शोक से मुक्ति मिल जाती है। ऐसे में नवरात्र की अवधि कूष्मांडा देवी की कृपा के लिए खास मानी जाती है।
मां कूष्मांडा का स्तोत्र (Maa kushmanda Stotra)
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु चाप, बाण, पदमसुधाकलश चक्र गदा जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीया कृदुहगस्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर किंकिण रत्नकुण्डल मण्डिताम्।
प्रफुल्ल वदनां नारू चिकुकां कांत कपोलां तुंग कूचाम्।
कोलांगी स्मेरमुखीं क्षीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम् ॥
मां कुष्मांडा का कवच –
हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिग्विदिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजम् सर्वदावतु॥
मां कुष्मांडा का ध्यान –
वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥
भास्वर भानु निभाम् अनाहत स्थिताम् चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पद्म, सुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कोमलाङ्गी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥