कुशीनगर में एक साथ उठीं 13 चिताएं तो दहल उठा सबका कलेजा, उपस्‍थ‍ित हर व्‍यक्‍त‍ि की आंखों में आंंसुओं का सैलाब

कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया थाने के गांव नौरंगिया का स्कूल टोला बुधवार की रात को दस परिवारों के 13 लोगों की दर्दनाक मौत के गम के बोझ से गुरुवार को कराहता मिला। पूरा जवार मातमी चादर में समाया हुआ है। सबके चेहरे पर मांगलिक आयोजन के दौरान मौत का कारण बने कुआं का दर्दनाक मंजर कायम है। पुलिसिया चहलकदमी व सियासी पांवों की दौड़ के बीच सिसकियों का शोर सुनाई दे रहा था तो आंसुओं का सैलाब गांव के हर घर के दर पर दिख रहा था।

पुलिसिया चहलकदमी व सियासी पांव के बीच सिसकियों का शोर, आंसुओं का सैलाब

सुबह जब पोस्टमार्टम के बाद एक साथ 13 शव गांव पहुंचे तो पूरा गांव एक साथ चीत्कार मारकर रो पड़ा। करूण क्रदंन और लोगों की चीख पुकार से मानो कोहराम मच गया। सुबह ही पहुंचे डीएम एस राजलिंगम व एसपी सचिन्द्र पटेल पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से चार लाख रुपये देने की बात कर रहे थे। पर, लोगों के बहते आंसू उनके दर्द देख वे भी ठिठक जा रहे थे। इसी बीच युवाओं का एक समूह कोटवा सीएचसी पर तैनात कर्मचारियों व चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर बैठ गए।

स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगा ग्रामीणों का एक घंटे तक सड़क जाम

उनका कहना था कि यदि व्यवस्था ठीक रहती तो पांच जानें तो बच ही गई होतीं। एंबुलेंस तक समय से नहीं पहुंची। दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। डीएम के आश्वासन पर एक घंटे बाद माने तो सड़क पर अवागमन बहाल हो सका। इसके बाद शवों के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर ले जाने की तैयारी शुरू हो सकी। जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक पटेल की देखरेख में राजस्व व पुलिसकर्मियों ने स्वजन व रिश्तेदारों का हाथ बंटाते हुए अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कराईं।

एक साथ न‍िकलीं इनकी अर्थियां

एक साथ परी पुत्री अजय चौरसिया डेढ़ वर्ष, मीरा पुत्री सुग्रीव विश्वकर्मा 22 वर्ष, सुंदरी पुत्री प्रमोद कुशवाहा नौ वर्ष, राधिका पुत्री महेश कुशवाहा 20 वर्ष, मन्नू पुत्री श्रवण विश्वकर्मा 12, पूजा यादव पुत्री बलवंत यादव 20, शशिकला चौरसिया पुत्री मदन 16, ज्योति चौरसिया पुत्री राम बड़ाई 15 वर्ष, पूजा चौरसिया पुत्र राम बड़ाई 17 वर्ष, ममता पत्नी रमेश चौरसिया 35 वर्ष, शकुंतला पत्नी भोला 34 वर्ष, बृंदा पुत्री मंगरू 20 वर्ष, आरती पुत्री इंद्रजीत चौरसिया सात वर्ष की अर्थियां निकलीं तो प्रशासनिक अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं। शांति व्यवस्था को लेकर आठ थानों की पुलिस व पुलिस अधिकारी तैनात रहे।

फिलहाल रुकी शादी

स्वजन ने शादी टाल दी है। आज बरात जानी थी। दूल्हे के पिता परमेश्वर का कहना है कि हमने शादी रोक दी है, अगर लोगों की राय होगी तो शादी के लिए केवल लड़के को भेजकर रस्म करा दी जाएगी। गांव में मातम छाया है तो हम बरात कैसे निकाल सकेंगे। मेरे घर भले ही कोई नहीं मरा है लेकिन मरने वाले सभी मेरे अपने ही हैं।

खाना खिलाने की हो रही थी तैयारी

ग्रामीणों का कहना है कि महिलाएं मटकोड़ में व्यस्त थीं। पुरुष खाना खिलाने की तैयारी में लगे थे। इसी बीच कुआं में महिलाओं के गिरने की खबर से हर कोई उस तरफ दौड़ पड़ा। लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। इसी बीच कुछ नौजवान लड़के रस्सी के सहारे कुएं में उतर गए और महिलाओं व बच्चियों को निकालना शुरू कर दिया। रेस्क्यू में पूरा गांव रस्सी और सीढ़ियों के सहारे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा। सेप्टिक टैंक से लगभग नौ टैंकर पानी बाहर निकाला गया। उसके बाद लाशें निकलनी शुरू हुईं थीं।

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