जबलपुर में नगर निगम ने अब एक बार फिर तालाबों के सौंदर्यीकरण का उठाया बीड़ा….

कभी 52 ताल-तलैयों का शहर कहे जाने वाले जबलपुर में अब बमुश्किल 30-32 तालाब ही शेष रह गए हैं। ये भी अपने अतिस्तव की लड़ाई खुद ही लड़ रहे हैं। तालाब के इर्द-गिर्द बनी बस्तियों ने तालाबों को लील लिया है। बस्तियों के गंदे पानी से तालाब प्रदूषित हो रहे हैं। लिहाजा नगर निगम ने अब एक बार फिर तालाबों के सौंदर्यीकरण का बीड़ा उठाया है। पहले चरण में नगर निगम ने शहर के नौ तालाबों को लिया है। जिसे साफ कर सुंदर बनाने के लिए स्वच्छता सेल में अलग से टीमें गठित की गई है। इसके उपरांत शहर के अन्य तालाबों को भी योजना में शामिल कर सफाई कराई जाएगी।

इन तालाबों को होगा कायाकल्प: निगमायुक्त आशीष वशिष्ठ के निर्देश पर संग्राम सागर तालाब बाजनामठ, शाही तालाब संजीवनी नगर, गुलौआताल, सूपाताल, कान्हा लेक व्यू, गंगा सागर तालाब, अधारताल बिरसामुंडा चौक, हनुमानताल, मानेगांव तालाब, खंदारी लेक डुमना नेचर पार्क का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए स्मार्ट सिटी सीईओ निधि सिंह राजपूत, अपर आयुक्त महेश कुमार कोरी, सहायक आयुक्त वेदप्रकाश, स्वास्थ्य अधिकारी भूपेंद्र सिंह, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी सुनील गुजराती, अनिल जैन, केके दुबे, अनिल बारी के अलावा संभागीय अधिकारियों और मुख्य स्वच्छता निरीक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

तालाबों में घुल रही बस्तियों की गंदगी: विदित हो कि तालाबों में आस-पास बनी बस्तियों की गंदगी भी समाहित हो रही है। शहर के रानीताल, गंगा सागर, गोकुलपुर, सीता सरोवर, इमरती तालाब, गोपालबाग, हनुमानताल, सूपाताल, देवताल, महानद्दा आदि अन्य तालाबों के इर्द-गिर्द बस्तियां बस गई है।तालाबों के किनारे आम नागरिकों के अलावा भू माफियाओं ने कब्जा कर लिया है। जिससे तालाब का आकार भी घट गया है। वर्तमान में शहर के तालाबों के आस-पास की बस्तियों का मलजल नालियों के माध्यम से सीधे तालाबों में मिल रहा है। जिससे तालाब तो प्रदूषित हो रहे हैं, सौंदर्यीकरण भी प्रभावित हो रहा है। निगमायुक्त ने पीडब्लयूडी के अधिकारियों को बस्तियों में सीवर का प्लान एक सप्ताह में तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं।

Back to top button