अगर अब शराब से किसी की भी हुई मौत तो धंधेबाजों को होगी फांसी

उत्तर प्रदेश आबकारी संशोधन विधेयक गुरुवार को विधानसभा में पेश कर दिया। इस विधेयक के पास होने से अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगेगा। आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह की ओर से यह विधेयक पेश किया गया। इसके जरिए आबकारी एक्ट 1910 में संशोधन किया गया है साथ ही एक नई धारा ‘60 क’ जोड़ी गई है। हालांकि इसका अध्यादेश सितंबर में ही जारी हो चुका है।
विधेयक के जरिए आबकारी अधिनियम 1910 की दो दर्जन से अधिक धाराओं में संशोधन किया गया है। सितंबर माह में अध्यादेश के जरिए अधिनियम की धारा 30, 50, 51, 52, 53, 54, 55, 60, 62, 63, 64, 64क, 65, 66, 67, 68, 69, 69क, 70, 71, 72, 73क, 74 एवं 74 क में संशोधन किया गया था। साथ ही एक नई धारा ‘60 क’ जोड़ी गई थी।
इसमें अवैध शराब से मौत होने या स्थाई अपंगता होने पर आजीवन कारावास या 10 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों, या मृत्युदंड तक का प्रावधान है। आबकारी अधिनियम की धारा 30 में संशोधन से प्रदेश आबकारी विभाग द्वारा असावधानी से लिए जा रहे प्रतिफल शुल्क की धनराशि पर टैक्स की देयता 1 अप्रैल 2016 से लागू हो चुकी है।
विधेयक के अनुसार अवैध शराब के कारोबार को शह देने वाले विभागीय अफसरों की लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर कठोर दंड देने प्रावधान है। आबकारी कानून में कठोर दंड का प्रावधान होने से तलाशी आदि के मामले में जरा भी लापरवाही पर संबंधित अफसर के खिलाफ निलंबन और बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकेगी।





