300 से ज्यादा प्राइवेट इंजिनियरिंग कॉलेज बंद , अब अपनाना होगा दूसरा रास्ता


एआईसीटीई वेबसाइट के मुताबिक, भारत में करीब 3,000 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में इंजीनियरिंग स्नातक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई होती है, जिनमें 13.56 लाख स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। इनमें से 800 इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे हैं जिनके तय सीटों पर 50 पर्सेंट से भी कम ऐडमिशन हो रहे हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, जिन 300 कॉलेजों को बंद करने को कहा जा रहा है उनमें से 150 कॉलेजों में 20 पर्सेंट से भी कम सीटों पर ऐडमिशन हुआ है। एआईसीटीई के चेयरपर्सन के मुताबिक, परिषद ने उन कॉलेजों को जहां नामांकन 30 पर्सेंट से कम है, वैकल्पिक विकल्पों के लिए काम करने को कहा है।
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एआईसीटीई इंजीनियरिंग कॉलेजों को विज्ञान कॉलेजों, कौशल विकास केंद्रों या व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों में परिवर्तित करने जैसे विकल्प देगी। इस मामले में कॉलेजों को कोई आदेश दिए जाने से पहले दिसंबर 2017 के अंत तक निर्णय लिया जाएगा। सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि इंजिनियरिंग कॉलेजों का साइंस कॉलेज या वॉकेशनल इंस्टिट्यूट में बदल जाना उनके लिए फायदेमंद है क्योंकि काफी समय से उनकी कमजोर परफॉर्मेंस के कारण ही वहां इतने कम ऐडमिशन हो रहे हैं।





